गोंडा। त्वरित, सस्ता एवं सुलभ न्याय सभी लोगों का मौलिक अधिकार है। इसे मुहैया कराने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जनपद न्यायाधीश डॉ. दीपक स्वरूप सक्सेना के आदेश पर 12 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जनपद न्यायालय एवं समस्त तहसील स्तर पर किया गया है। किसी भी न्यायालय अथवा विभागीय मामलों को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित कराकर अंतिम आदेश व निर्णय प्राप्त कर लंबित मामले से छुटकारा पाने का यह स्वर्णिम अवसर है। इसमें 48 हजार से अधिक मामलों, वादों का निपटारा कराने का लक्ष्य रखा गया है।
शनिवार को इस बात की जानकारी देते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कृष्ण प्रताप सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सभी प्रकार के शमनीय आपराधिक मामले, बैंक रिकवरी के वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर, श्रम वाद, बिजली व जल के बिल से संबंधित शमनीय दंड वाद, वैवाहिक, पारिवारिक वाद, भूमि अध्याप्ति वाद, सेवानिवृत्ति के परिलाभों संबंधी मामले, रेलवे दावा संबंधी प्रकरण, राजस्व वाद व अन्य सिविल वाद, यातायात, लघु आपराधिक प्रकरण, नगरपालिका आदि से संबंधित मामलों एवं बैंक मामले, धारा 138 पराक्रम लिखित अधिनियम वाद, प्री-लिटिगेशन के माध्यम से ऐसे वाद जिसमें निष्पादन योग्य डिग्री पारित हो, भूमि अधिग्रहण वादों, स्टांप वादों, उपभोक्ता फोरम के मामले, श्रम मामलों, माध्यस्थम प्रकरणों आदि को पक्षकारों की सहमति से लिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि पब्लिक प्रिमिसेज एक्ट संबंधी मामले उत्तराधिकार संबंधी मामले, वन अधिनियम के उपयुक्त प्रकरण, बीमा संबंधी वाद, स्थानीय विधियों के अंतर्गत शमनीय वाद, सेवा व वेतन संबंधी मुकदमे, सेवानिवृत्ति परिलाभों से संबंधित प्रकरण, किरायेदारी वाद, वन अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण, पुलिस अधिनियम के अंतर्गत चालान, मोटर यान अधिनियम के अंतर्गत चालान, ई-चालान, उत्तर प्रदेश एवं वाणिज्य अधिनियम के अंतर्गत चालान, चलचित्र अधिनियम के अन्तर्गत, आबकारी अधिनियम संबंधी वाद, गैंबलिंग एक्ट के अंतर्गत चालान, नगर निगम, नगर पालिका के अंतर्गत चालान विकास प्राधिकरण, दाखिल खारिज वाद, प्री-लिटिगेशन प्रकरण, मनरेगा प्रकरण, शिक्षा का अधिकार संबंधी प्रकरण समेत अन्य मामलों का निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने वादकारियों से अपील किया है कि किसी भी लंबित वाद, विवाद, शिकायत को राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित कराने हेतु संबंधित न्यायालय, फोरम अथवा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी जनपद न्यायालय व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकते हैं।