गोंडा। अभी तक सरयू व घाघरा नदियों में उफान आने पर केवल दो तहसील क्षेत्र से जुड़े इलाके ही प्रभावित होते थे। इस बार अफसरों की लापरवाही से किसानों पर भारी पड़ रही है। इसके चलते ही बरसात के जोर पकड़ते ही जिले की चारों तहसील क्षेत्रों में तबाही का मंजर दिखने लगा है। टेढ़ी नदीं के बाद इस बार बिसुही ने आंख तरेरी तो 50 हजार किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो गई।
इसका कारण नहरों की सफाई कराए बिना पानी छोड़ना, नदियों के कछार पर अतिक्रमण होना बताया जा रहा है। इसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
बरसात के दिनों में किसानों को पानी की जरूरत सिंचाई के लिए कम ही पड़ती है। रवि सीजन में जब किसानों को सिंचाई के लिए पानी की जरूरत पड़ती है तो नहरें प्राय: सूखी रहती हैं।
इस बार जिले में सरयू नहर की 1628 किलोमीटर नहरों में 90 प्रतिशत नहरें लबालब हो गईं। मुख्य नहर शाखाओं से पानी को माइनर व टेल तक छोड़ दिया गया जिससे टेल का पानी सीधे नदियों में प्रवाहित होने लगा। इससे नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा।
इधर दो दिनों तक करीब 370 मिलीमीटर बारिश हो गई और नदियों में नहर के पानी के साथ बरसात का पानी भी एकत्र होने लगा है। इससे तहसील सदर क्षेत्र में बिसुही व मनवर नदी ने तबाही मचा दी।
इससे दो ब्लाक क्षेत्रों के करीब 50 हजार किसानों की धान, मक्का, गन्ना, तिल, उड़द सहित तमाम फसलें तबाह हो गईं। बिसुही नदी में बाढ़ आने से करीब 40 ग्राम पंचायतों में 50 हजार किसान प्रभावित हो गए और सैकड़ों एकड़ फसल पानी में ही नष्ट हो गईं।
मनकापुर मुख्य नहर शाखा बहराइच से होते हुए रुपईडीह ब्लाक, इटियाथोक ब्लाक, मुजेहना ब्लाक होते हुए मनकापुर तथा आगे बस्ती जाकर मिलती है। इस मुख्य शाखा से 40 से अधिक माइनर व टेल निकले हैं जिससे किसानों को उनके खेत के पास ही सिंचाई की सुविधा मिल सके।
माइनर में टेल का पानी आगे चलकर किसी नाले या नदियों में गिराया जाता है। इस बार सरयू नहर की तीन माइनर को छोड़कर सभी में पानी छोड़ दिया गया जिससे नहरों का पानी नदियों में प्रवाहित हो गया।
जिस समय नहर का पानी नदियों में प्रवाहित हो रहा था उसी समय बारिश भी अधिक हुई जिससे पानी का फैलाव किसानों के खेतों तक हो गया। मनकापुर शाखा से निकलने वाली माइनर शाहपुर में एक गैप है। परकोना में दो गैप हैं और सिंहपुर में एक गैप है।
प्राय: बिसुही नदी में बाढ़ नहीं आती है। बिसुही नदी बहराइच से निकलती है, जबकि मनवर नदी का इटियाथोक ब्लाक के तिर्रेमनोरमा पौराणिक स्थल पर एक पोखरे से निकली है। इस बार करीब 36 साल यह दोनों नदी उफान पर है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ा है। अंतिम बार वर्ष 1984-85 में विसुही नदी में बाढ़ आई थी। 36 साल बाद इन दोनों नदियों ने तबाही मचाई तो किसानों की फसल तबाह हो गई।
बिसुही नदी दो तहसील क्षेत्रों से होकर बस्ती में सरयू से मिलती है। बिसुही व मनवर में ही तीन चीनी मिलों का पानी भी गिरता है। मिलों का कचरा गिरने से नदी में सिल्ट का जमाव अधिक हो गया है। इसके अलावा इटियाथोक, मनकापुर व बभनान के पास कई स्थानों पर नदियों के कछार पर अतिक्रमण होने के कारण नदी का फाट सकरा हो गया है जिससे उसका प्रवाह कम हो गया। यही कारण है कि नदियों में नहर का पानी गिरने, बारिश का पानी एकत्र होने के कारण नदी का पानी उलटा बहने लगा और किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।