गोंडा के इटियाथोक में सरयू नहर की शाखा।
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गोंडा। देश की सबसे बड़ी नहर परियोजना की शुरुआत से जिले के ढाई लाख किसानों के उम्मीदों की फसल लहलहा उठेगी। किसानों को महंगी सिंचाई के बोझ तले नहीं दबना पड़ेगा। उनकी आय दुगनी करने की योजना को धार मिलेगी और किसानों को मामूली खर्च पर सिंचाई की सुविधा मिलेगी। प्रधानमंत्री के लोकार्पण का बटन दबाते किसानों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। लोग कहने लगे कि असिंचित क्षेत्र के निए सरयू नहर किसी वरदान के लिए कम नहीं है।
शनिवार को देश की सबसे बड़ी नहर परियोजना का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलरामपुर के हंसुवाडोल से किया। परियोजना के लोकार्पण से जिले के ढाई लाख किसानों को मंहगी सिंचाई ने निजात पाने की उम्मीद जग गई। जिले के छह सौ गांवों से करीब 808 किलोमीटर तक नहरों का जाल बिछाया जा चुका है। नहरों में पानी आने से दो लाख 41 हजार किसानों के उम्मीदों की फसल लहलहाएगी। जिले के किसान पंपिंग सेट व बोरिंग के सहारे अपने खेतों की सिंचाई करते आ रहे हैं। एक बार में एक बीघा खेत की सिंचाई करने में सात सौ से आठ सौ रुपये तक का खर्च आ जाता था। तीन से चार बार सिंचाई में चार हजार रुपये प्रति बीघा का खर्च किसानों की आमदनी में सेंध लगा देता है। अब इन अल्प शुल्क में इन किसानों के उम्मीदों की फसल लहलहा उठेगी।
किसान बोले, अब बढ़ेगी आमदनी
महंगी सिंचाई से निजात मिलने की खबर सुनकर किसानों में हर्ष का माहौल रहा। किसानों ने कहा कि अब सुलभ व सस्ती सिंचाई से फसल की लागत कम होगी और उनकी आमदनी बढ़ेगी। दरियापुर हरदो पट्टी निवासी किसान सुधांशु उपाध्याय कहते हैं कि सिंचाई के अभाव में हमारे खेत सूखे पड़े रहते थे। अब नहर से पानी मिलने पर हमारे खेतों में भी हरी भरी फसल लहलहाएगी। हमारा परिवार खुशहाल व संपन्न बनेगा। इंद्रापुर निवासी किसान गिरीश शुक्ल ने बताया कि हमारे खेतों में अभी तक मौसम के अनुकूल परंपरागत फसल ही सिंचाई के अभाव में उग पाती थी।
सिंचाई का साधन मिलने पर हम लोग खेत में नकदी फसल उगाकर अच्छा मुनाफा कमाएंगे। भदुआ तरहर के प्रगतिशील किसान श्रीश्याम अवस्थी ने बताया कि सिंचाई के अभाव में अभी तक हम लोग अपने खेतों की प्यास नहीं बुझा पाते थे। सरयू नहर से अब हमारे सूखे खेतों की धरती की प्यास बुझेगी और हम लोग नकदी फसल पैदा कर समृद्घ बनेंगे। जमुनही हरदो पट्टी निवासी किसान विकास सिंह ने बताया कि आजादी के 70 साल बाद भी हमारे गांवो में किसानों को सस्ती सिचांई का लाभ नहीं मिल पा रहा था। यहां के किसान खेती राम भरोसे करते थे। सरयू नहर के शुरू होने से खेतों में भी हरित क्रांति आएगी। जिले के करीब पांच सौ गांव के किसान अपनी इच्छा के अनुसार खेतों में फसल उगा सकेंगे।