गोंडा। सड़क हादसों में कमी लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के स्तर से लागू हुई आईरैड एप कार्ययोजना कागजों में ही सिमटी है। इसके चलते जिले के 17 थानाक्षेत्रों के पुलिस कर्मियों के मोबाइल में आईरेड एप तो लोड है लेकिन इसमें सड़क दुर्घटनाओं का ब्यौरा अपलोड न होने से हादसों का आंकड़ा सिफर बताता है।
जिले में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की कार्ययोजना बनाने के लिए एप पर हादसों का पूरा डाटा अपलोड किया जाना था। एप पर ब्यौरा अपलोड न होने से सड़क हादसों में कमी लाने की कोशिश बेकार साबित हो रही है।
औसतन जिले के 17 थाना क्षेत्रों में हर दिन पांच से छह सड़क हादसे होते हैं। इसकी सूचना पर डायल 112 के पुलिस टीम मौके पर पहुंच कर घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मददगार बनती है।
इसके बाद भी हादसों को ब्यौरा आईरैड एप पर अपलोड करने में पुलिस कर्मी कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। पुलिसकर्मियों की इस लापरवाही से आईरैड एप के जरिए हादसों के कारणों पर मंथन नहीं हो पाने से इनमें कमी लाने की कार्ययोजना पर भी मंथन नहीं हो पा रहा है।
-जिले में होने वाले सड़क हादसों का कारण और इस पर रोक लगाने की योजना बनाने के लिए दुर्घटना स्थल पर पहुंचने वाले पुलिस कर्मियों को मौके से ही हादसे का ब्यौरा आईरैड मोबाइल एप पर अपलोड करना होता है। इसमें किस वाहन से हुआ हादसा, कितने लोगों की हुई मौत हुई, कितने हुए घायल और प्रथम दृष्टया हादसे का कारण क्या रहा। किसकी कौन सी गलती जानलेवा बनी, जैसी जानकारी का डेटा तैयार होता।
सड़क हादसों में कमी लाने के लिए हादसों के बाद एप पर तैयार डेटा बेस का मंथन संभागीय परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग के साथ ही पुलिस विभाग के अधिकारियों को करना था। इस पर अध्ययन व चर्चा के बाद रोकथाम के लिए तीनों विभाग की तैयार रिपोर्ट को आईरैड एप पर अपलोड कर अमल में लाना था।
सड़क हादसों में कमी लाने के लिए आईरैड एप लांच किया गया था। इसमें सड़क हादसे के दौरान सबसे पहले पहुंचने वाले संबंधित थाना व चौकी पुलिस कर्मियों को हादसे के कारणों पर अपनी रिपोर्ट लोड करना होती है। इस एप पर अपलोड दुर्घटनाओं के विवरण के आधार पर ही रोकथाम की कार्ययोजना बननी थी। मगर थाना स्तर पर पुलिस आईैरैड एप पर हादसों का ब्यौरा अपलोड नहीं कर रही है।