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भाजपा शासन में हर बार बने मंत्री, पहली बार चूके रमापति

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गोंडा। शुक्रवार को राजधानी में योगी सरकार के शपथ ग्रहण कार्यक्रम पर जिले के लोगों की निगाहें टिकी रहीं। हर कोई कयास लगा रहा था, लेकिन मंत्रियों की सूची जारी होने पर लोगों को मायूसी हाथ लगी। साल 2007 के बसपा सरकार के बाद पहला मौका है, जब प्रदेश सरकार में जिले का प्रतिनिधित्व नहीं हैं। इसके पहले 1990 से लगातार चाहे जिसकी सरकार रही, जिले से विधायकों को मंत्रीमंडल में स्थान हासिल होता रहा है। भाजपा शासन के शुरूआती दौर से रमापति शास्त्री जब-जब भाजपा की सरकार बनी, वह मंत्री जरूर बने। इस बार प्रोटेम स्पीकर बनकर बड़े नेता के रूप में उभरे, लेकिन मंत्रीमंडल में स्थान पाने से वंचित रह गए।
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प्रदेश में योगी सरकार का गठन शुक्रवार को हो गया। जिले से कयास लगाया जा रहा था कि दो विधायक मंत्री बन सकते हैं। जिसमें प्रदेश के बड़े नेताओं में शुमार रमापति शास्त्री के मंत्री बनने की तो पूरी उम्मीद थी। इससे पहले वह कल्याण सिंह सरकार में समाज कल्याण व राजस्व मंत्री रह चुके हैं। बसपा- भाजपा गठबंधन सरकार में भी वह स्वास्थ्य मंत्री रहे। साल 2017 में योगी सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहे। इस बार उनकी वरिष्ठता पर प्रोटेम स्पीकर तो बनाया गया है। 2017 में देवीपाटन मंडल से तीन मंत्री थे। इस बार किसी के मंत्री न बनने से लोगों को मायूसी मिली है। लोगों का कहना है कि मंडल के ही नहीं आसपास के सभी जिलों में शत- प्रतिशत सीटें भाजपा को नहीं मिली है। गोंडा की सभी सीटें भाजपा के खाते में है। ऐसे में मंत्रिमंडल में किसी न किसी को शामिल करने की पूरी उम्मीद थी। लोगों को उम्मीद है कि रमापति शास्त्री के प्रोटेम स्पीकर का कार्य पूरा होने के बाद उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। हो सकता है कि विधानसभा अध्यक्ष बनें या फिर मंत्री भी बन सकते हैं। लेकिन अभी इस पर संशय बना हुआ है। (संवाद)
बसपा छोड़कर अन्य सरकारों में जिले को मिलते रहे हैं मंत्री
साल 2007 की बसपा सरकार को छोड़ दें तो हर बार जिले से कोई न कोई मंत्री बनते रहे हैं। 1990 से देखा जाए तो साल 2002 तक रमापति शास्त्री ही भाजपा शासन में मंत्री बने। साल 2002 में जब दूसरी बार भाजपा व बसपा गठबंधन की सरकार बनी तो वह चुनाव नहीं जीते थे। ऐसे में उस समय जिले से मुजेहना के विधायक रहे धनश्याम शुक्ला भाजपा कोटे से और करनैलगंज के विधायक योगेश प्रताप सिंह बसपा कोटे से मंत्री बने। बाद में गठबंधन टूटा और सपा की मुलायम सरकार बनी तो बसपा छोड़कर आए योगेश प्रताप सिंह व विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह राज्यमंत्री बने। इसके बाद साल 2007 में बसपा सरकार बनी, उस समय कोई मंत्री जिले को नहीं मिला। साल 2012 में सपा की अखिलेश सरकार बनी तो पहले गौरा विधायक कुंवर आनंद सिंह, सदर विधायक विनोद कुुमार सिंह मंत्री बने। बाद में योगेश प्रताप सिंह फिर मंत्री बने। साल 2017 में योगी सरकार बनी तो रमापति शास्त्री मंत्री बने, इस बार कोई मंत्री नहीं बन सका।
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