गोंडा। बेसिक स्कूलों में बच्चों को दोपहर में भोजन देने की एमडीएम योजना महंगाई के दर्द से हांफ रही है। जिले के 2628 स्कूलों में पढ़ने वाले चार लाख से अधिक बच्चों को भोजन देने में प्रधानाध्यापकों के पसीने छूट रहे हैं। दो साल पहले तय कन्वर्जन कास्ट पर भोजन बनवाना चुनौतीपूर्ण बना है। खाद्य तेल, दाल, सब्जी, गैस सिलेंडर की रीफिलिंग आदि पर महंगाई का असर हुआ, फिर भी बेसिक स्कूलों में चलाए जा रही योजना के कन्वर्जन कॉस्ट में दो सालों से वृद्धि नहीं हुई है। कन्वर्जन कॉस्ट अभी भी अप्रैल 2020 के रेट पर चल रही है। गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध करा पाना चुनौती बन गया है।
स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना से जिले के चार लाख बच्चों को निशुल्क भोजन की व्यवस्था है। इन स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर 4.97 रुपये प्रति छात्र और उच्च प्राथमिक स्तर पर 7.45 रुपये प्रति छात्र की दर से कन्वर्जन कॉस्ट मिल रही है। वह कन्वर्जन कास्ट वर्ष 2020 में लागू हुई थी। तब से लगभग दो वर्ष का वक्त बीत चुका है, लेकिन कन्वर्जन कास्ट के रेट में एक पैसे की बढ़ोतरी नहीं हुई है। इससे स्कूलों में रसोई चलाने में प्रधानाध्यापकों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें सब्जियों, दाल के साथ ही मसाला आदि भी खरीदना पड़ता है। जिसका खर्च कन्वर्जन कास्ट से ही होता है। इनके भी दाम बढ़े हैं, इससे उन्हें दिक्कत हो रही है। विभाग के अधिकारी भी मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह शासन के निर्णय से हो सकता है। कन्वर्जन कास्ट का भुगतान सीधे प्राधिकरण से तय होता है और बजट आता है। ऐसे में जिले स्तर पर कोई निर्णय नहीं ले सकते हैं। विभाग को बढ़ोत्तरी होने का इंतजार है। (संवाद)
बढ़ते ही जा रहे सामग्री के मूल्य
भोजन बनाने के लिए जरूरी सामानों के मूल्य लगातार बढ़ते जा रही है। वर्तमान में खाद्य तेज, दाल, सब्जी, हरी सब्जी, फल व दूध आदि पर महंगाई की मार पड़ी है। गैस सिलेंडर रीफिलिंग के दाम करीब दोगुने हो गए हैं। साल 2020 में साढ़े छह सौ रुपये में मिलने वाला गैस सिलिंडर अब एक हजार के पार हो गया है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वर्ष 2020 में अरहर की दाल 80 रुपये के आसपास थी जो अब 130 रुपये से अधिक प्रति किलो हो गई है। सरसों का तेल दोगुने दाम पर मिल रहा है। 2020 में इसका रेट 100 रुपये के आसपास था जो लगभग 200 रुपये के आसपास है। सब्जियों का मूल्य भी बढ़ा हुआ है।
स्कूल के प्रधानाध्यापकों को झेलनी पड़ रही परेशानी
स्कूलों में भोजन बनवाने के लिए भले ही प्रधान व प्रधानाध्यापक के संयुक्त हस्ताक्षर के खाते में बजट आता है। लेकिन पूरी जिम्मेदारी विभाग प्रधानाध्यापकों की तय करता है। ऐसे में कन्वर्जन कॉस्ट में वृद्धि न होने से प्रधानाध्यापकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। विभागीय अधिकारी व प्रशासन के अधिकारी विद्यालय में निरीक्षण के समय पहले एमडीएम की गुणवत्ता ही चेक करते हैं। गुणवत्ता खराब मिलने पर संबंधित प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई होती है। शिक्षकों ने कन्वर्जन कॉस्ट के दामों में बढ़ोतरी की मांग की है। पहले हर वर्ष कन्वर्जन कॉस्ट बढ़ती रही है, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
स्कूलों में बच्चों को दोपहर में भोजन देने के लिए एमडीएम के कन्वर्जन कास्ट को बढ़ाया जाना चाहिए। सरकार इसके लिए जल्द ही कार्रवाई करें। प्रधानाध्यापकों को दिक्कत आ रही है। विनय कुमार तिवारी, अध्यक्ष शिक्षक संघ
एमडीएम में किसी तरह का निर्णय शासन से ही होता है। जिले स्तर से कोई प्रक्रिया संभव नहीं है। कन्वर्जन कास्ट की लागत बढ़ने पर स्कूलों को राशि भेजी जा सकेगी। गणेश गुप्ता, जिला समन्वयक एमडीएम