गोंडा। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल में 1700 बेटियों के लिए सामग्री सप्लाई में हुए घपले में कई लोगों की गर्दन फंसी है। 96 लाख बजट में हुए घपले में शासन की ओर से कार्रवाई की तैयारी हो रही है।
बालिका शिक्षा समन्वयक और लेखाधिकारी पर कार्रवाई के बाद घपले की धरातल तैयार करने वालों पर कार्रवाई की गाज गिरनी तय है। माना जा रहा है कि निविदा में ही सामग्री का मूल्य बढ़ाकर तय किया गया था।
डीएम की रिपोर्ट में विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई थी, अब शासन स्तर पर मंथन हो रहा है कि असल जिम्मेदार कौन है। इस मामले में सेवा से बर्खास्त की गईं बालिका शिक्षा समन्वयक रजनी श्रीवास्तव ने भी मोर्चा खोल दिया है।
जिले के 17 कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में सामग्री की सप्लाई की गई थी। सामग्री खरीद में एमआरपी से अधिक मूल्य पर चार लाख 85 हजार 40 रूपए अधिक भुगतान किया गया। जिलाधिकारी ने सोमवार को जिला समन्वयक बालिका शिक्षा रजनी श्रीवास्तव व लेखाधिकारी की सेवा समाप्त करने का आदेश दिया है। इस कार्रवाई के बाद से विभाग में खलबली मच गई है।
आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। फिलहाल सामग्री खरीद माह फरवरी में ही हुई थी, ऐसे में भुगतान के लिए निविदा की प्रक्रिया इससे पहले पूरी की गई थी। निविदा के साथ रेट तय करने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के आसार बढ़ गए है।
बताया जा रहा है कि अधिक मूल्य पर निविदा कराने के मामले में सीडीओ ने जांच में ही कार्रवाई की है। उन्होंने निविदा को निरस्त कर दिया है। जिला समन्वयक और लेखाधिकारी की मुश्किलें बढ़ीं।
मामले में कई और लोगों की संलिप्तता पर कार्रवाई तय होनी है। अधिकारियों का कहना है कि आगे का निर्णय शासन स्तर से ही होना है। जांच की कार्रवाई पहले ही पूरी हो चुकी है और कार्रवाई महानिदेशक स्कूली शिक्षा के आदेश पर की गई है।
कोविड काल में स्कूलों के बंद होने व खोलने के आदेश में हमेशा जारी हो रहे। राज्य परियोजना से 5 फरवरी को आदेश जारी करके 10 फरवरी से स्कूल खोले जाने का आदेश जारी हुआ। 10 फरवरी से 23 मार्च के बीच बड़ी मात्रा में सामग्री क्रय कर ली गई।
खरीद की प्रक्रिया परियोजना निदेशक की ओर से तय मात्रा व मूल्य पर किया गया। लेकिन छात्राओं की उपस्थिति से अधिक सामग्री खरीदी गई। स्टाक में भी काफी सामग्री अप्रयुक्त रूप में मिली। जांच अधिकारियों ने सवाल उठाए कि आखिर जरूरत से अधिक सामग्री क्यों ली गई। इसके अलावा बाजार मूल्य से अधिक रेट पर खरीद भी सवालों से घिरी है।