गोंडा। जिले में जमीनों पर अवैध कब्जा कोई नई बात नहीं है। कई मामलों की जांच हो रही है। शहर से लेकर गांवों तक अवैध कब्जों का मामला सामने आ चुका है। जिले में 50 से अधिक संपत्तियां ऐसी हैं जो शत्रु संपत्ति घोषित हैं और ये जमीनें सरकार की हैं। इसके बाद भी जमीनों पर अवैध कब्जे हैं। मुख्यमंत्री ने शत्रु संपत्तियों के बारे में रिपोर्ट मांगी थी और तत्कालीन डीएम डॉ. नितिन बंसल ने रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी थी। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन के हाथ शत्रु संपत्तियों पर कब्जों पर कार्रवाई करने से कांपते दिख रहे हैं। डीएम मार्कंडेय शाही ने बताया कि जांच के लिए कमेटी बनाई है।
शत्रु संपत्तियों के मामले में कार्रवाई शुरू होने के बाद चर्चाएं तेज हो गई हैं। शहर ही नहीं गांवों में भी शत्रु संपत्तियों पर कब्जे के मामले तूल पकड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि नवाबगंज में सबसे अधिक शत्रु संपत्तियां हैं और उन पर भी कब्जे के मामले प्रशासन को पहले मिल चुके हैं। इसके बाद भी कोई कार्रवाई न होना चौंकाने वाला है। तरबगंज तहसील के लौव्वावीरपुर में भी शत्रु संपत्तियां हैं। इसके बारे में स्पष्ट नहीं है कि इन संपत्तियों पर किसका कब्जा है। बस शत्रु संपत्तियों के होने की रिपोर्ट पूर्व में सीएम कार्यालय को भेजी गई है। यह रिपोर्ट एक जन सूचना मांगे जाने पर तत्कालीन डीएम ने भेजी थी। उस समय नवाबगंज में 21 प्लाट होने की बात कही थी, इसी तरह नवाबगंज में भी 18 से अधिक प्लाट की रिपोर्ट है। सदर तहसील में भी शत्रु संपत्तियां भी हैं और इसकी भी रिपोर्ट है। जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी व सिटी मजिस्ट्रेट पूरे मामले की जांच करेंगे। जिससे बड़े खुलासे होना तय माना जा रहा है।
आजादी के बाद तय हुई थीं शत्रु संपत्तियां
शत्रु संपत्तियां आजादी के बाद 1968 में तय की गईं थीं। पाकिस्तान बंटवारे से यहां जो लोग संपत्ति छोड़कर चले गए और पाकिस्तान के नागरिक हो गए थे। उनकी संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित करके शासन ने अपने संरक्षण में ले लिया था। 2017 में शत्रु सपंत्तियों के मामले में केंद्र सरकार की ओर से संशोधन किया गया, और कई तरह के नियंत्रण किए गए। इसके बाद से लोगों की निगाहें शत्रु संपत्तियों पर टिक गई हैं। शत्रु संपत्तियों की जांच होगी और नए नियमों के तहत कार्रवाई तय होगी।
किसी ने किरायानामा तो किसी ने कर लिया कब्जा
शत्रु संपत्तियों को हासिल करने का खेल सुनियोजित ढंग से हुआ। प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए सभी ने अपने-अपने तरीकों से रास्ता निकाला। किसी ने किरायानामा बनवा रखा है और किराया जमा हो रहा है। कोई सीधे ही कब्जा करके कब्जे के आधार पर मालिक बनने की फिराक में है। अब नियमों के तहत कार्रवाई क्या होगी और किस तरह कब्जे हटाए जाएंगे, इसके लिए प्रशासन ने टीम बनाई है।