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इलाज के लिए भटकते रहते मरीज, तीमारदारों की तोड़ दी जाती गाड़ियां

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गोंडा के महिला अस्पताल में भीड़ लगाकर मरीज देखती स्वास्थ्यकर्मी। - फोटो : GONDA
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गोंडा। सरकारी अस्पतालों में जाने वाले मरीजों व तीमारदारों के लिए इलाज से ज्यादा बड़ी सिरदर्दी वाहनों की पार्किंग व्यवस्था बन रही है। अव्यवस्थाओं से घिरे महिला अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों व तीमारदारों को कदम-कदम पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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डॉक्टर व कर्मचारियों के नदारद रहने से दूर दराज से आई गर्भवती को घंटो तक लाइन में लगने से राहत के बजाय दर्द मिलता है। मंगलवार को जिला महिला अस्पताल में इलाज कराने आए दर्जनों तीमारदारों को सीएमएस के तुगलकी फरमान का शिकार होना पड़ा। सीएमएस के निर्देश पर अस्पताल परिसर में खड़े तीमारदारों के वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
जिला महिला अस्पताल में हर रोज सैकड़ों मरीज व तीमारदार आते हैं। इसके बावजूद अस्पताल में वाहन पार्किंग के लिए न तो कोई व्यवस्था है और न ही कोई सुरक्षाकर्मी। मंगलवार को अस्पताल परिसर में खड़े कई दो पहिया वाहनों को अस्पताल कर्मियों ने पलट दिया।
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इससे कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। पत्नी का इलाज कराने आए सत्यजीत ने बताया कि नए परिसर के पास जगह नहीं बचा तो पुराने परिसर में एक तरफ बाइक खड़ी कर दिया था लेकिन वापस लौटा तो बाइक पलटी मिली जिसका वाइजर टूट गया तथा पूरा पेट्रोल बह गया।
कोरोना संक्रमण के इस दौर में भी महिला अस्पताल के कर्मचारी लापरवाही से बाज नहीं आते। मंगलवार को अस्पताल के खून एवं अन्य जांच कक्ष में मरीजों से लिये गए सैंपल लावारिस पड़े दिखे। कक्ष में कोई कर्मचारी उपस्थित नहीं था बाहर जांच कराने वाले मरीजों की भीड़ लगी थी।
इसके साथ ही अस्पताल में दूसरे व तीसरे तल पर मरीजों के बैठने की उचित व्यवस्था न होने के कारण मरीजों के साथ आए तीमारदारों को जमीन पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है।
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