गोंडा। लखनऊ में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव के तीन कालीदास मार्ग स्थित बंगले पर तैनात 30वीं वाहिनी पीएसी गोंडा के एक जवान को मंगलवार तड़के संदिग्ध हालात में गोली लग गई। गंभीर हालत में उसे ट्रामा सेंटर पहुंचाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 30वीं वाहिनी के सेनानायक त्रिभुवन सिंह ने भी अस्पताल पहुंचकर घटना की जानकारी ली और सिपाही के इलाज का इंतजाम कराया।
सेनानायक त्रिभुवन सिंह ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उसका एसएलआर गिर गया था। सिपाही उसे उठाकर मैगजीन लगाने लगा। इसी दौरान ट्रिगर दबा और गोली उसकी गर्दन के आर पार हो गयी। बताया कि सिपाही मनोज कुमार मौर्या मूल रूप से उतरौला, बलरामपुर का रहने वाला है। वह 30 बटालियन में तैनात था और करीब 20 दिन से वह न्यायाधीश के घर के बाहर गार्द ड्यूटी में तैनात था। मंगलवार को करीब चार बजे भोर में वह संतरी ड्यूटी पर पहरा दे रहा था। इस बीच उसकी सेल्फ लोडिंग राइफल हाथ से छूटकर गिर गई। रायफल का मैगजीन बाहर निकल गया। सिपाही रायफल उठाकर मैगजीन लगाने लगा। इसी दौरान उसकी उंगली ट्रिगर पर पड़ गई। ट्रिगर दबते ही चेम्बर में लोड बुलेट फायर हो गयी और गोली मनोज के गर्दन को छेदते हुए पार हो गई। गोली की आवाज सुनते ही गारद में मौजूद अन्य सिपाही दौड़े। उन्होंने पुलिस को सूचना दी। गौतम पल्ली थाने की पुलिस घायल सिपाही को सिविल अस्पताल लेकर गयी। जहां हालत नाजुक देख उसे लखनऊ ट्रामा रेफर कर दिया गया। ट्रामा सेंटर इलाज के दौरान सिपाही की मौत हो गई।
नींद में हादसा होने की आशंका
सेना नायक ने बताया कि गार्द ड्यूटी तीन-तीन घंटे की शिफ्ट में लगती है। सिपाही मनोज रात एक बजे से चार की ड्यूटी पर था। ड्यूटी छूटने से कुछ देर पहले ही हादसा हो गया। सिपाही के घर वालों को सूचना दे दी गई है। वह 2018 बैच का सिपाही है। गोली लगने के बाद सिपाही मनोज होश में था। उसने अपने बयान में बताया है कि राइफल हाथ से छूटकर गिर गई थी। जिससे अचानक गोली चली गई। गोली कैसे चली, इसकी जानकारी के लिए रायफल की जांच कराई जा रही है।
20 फरवरी को होनी थी मनोज की शादी
सेनानायक ने बताया कि 2018 बैच का सिपाही मनोज बेहद हंसमुख मिजाज का था। बेटे को गोली लगने की सूचना पर मनोज के पिता साधू शरण ने बताया कि 20 फरवरी को उसकी शादी थी। घर में तैयारी चल रही थी। खुशी के माहौल में बेटे को गोली लगने की जानकारी मिलते ही मातम छा गया। सिपाही मनोज के पिता साधू शरण भी उतरौला से लखनऊ पहुंच गए।