गोंडा। गरीबों के लिए बने कांशीराम शहरी गरीब आवासों में ज्यादातर घर ठेकेदार या फिर पूर्व सभासद के हैं। व्यापारी या फिर कारोबारी भी इसका लाभ उठा रहे हैं। यह दावा खुद पालिकाध्यक्ष रूपेश कुमार उर्फ निर्मल श्रीवास्तव ने किया है। उन्होंने इस संबंध में डीएम को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। बता दें कि इन आवासों की मूलभूत सुविधाओं ही नहीं बल्कि इनकी देखरेख नगर पालिका के जिम्मे है।
पालिकाध्यक्ष रूपेश कुमार की मानें तो मुख्यालय पर 1,416 आवासों के लाभार्थियों में से महज 60 फीसद ही पात्र हैं, जो की गरीबी रेखा के नीचे आते हैं। बाकी 40 फीसद लोगों में ज्यादातर ठेकेदार हैं या फिर पूर्व सभासद हैं। तमाम ऐसे लोग भी योजना का लाभ ले रहे हैं, जो व्यापारी या फिर कारोबारी की श्रेणी में आते हैं। जिनके खुद के कई आवास हैं। उन्होंने बताया कि इसकी लिखित शिकायत कई ऐसे लोगों के नाम के साथ जिलाधिकारी से की गई है, जो किसी भी स्तर से गरीब नहीं हैं। जांच कराकर दोषी से आवास खाली कराने के साथ ही उनके खिलाफ कार्रवाई
किए जाने का आग्रह डीएम से किया गया है।