गाजीपुर। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को भूगोल परिषद की ओर से विश्व ओजोन दिवस मनाया गया। इस मौके पर मुख्य वक्ता वनस्पति शास्त्री डॉ. सर्वेश कुमार सिंह ने शोधपरक तथ्यों के जरिए बताया कि इस दिवस की परिकल्पना संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से मांट्रियल समझौते (1987) के बाद की गई। ओजोन के निर्माण, उसकी रासायनिक अभिक्रियाओं और नष्ट होने की यांत्रिकी को समझाते हुए पराबैंगनी किरणों के पृथ्वी पर आने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि यह परत समताप मंडल में पाई जाने वाली लगभग तीन मिलीमीटर मोटी ओजोन गैस की एक परत है, जिसका क्षरण मुख्य रूप से दक्षिणी ध्रुव के ऊपर अंटार्कटिका महाद्वीप पर हो रहा है। इसे बचाने के लिए रेफ्रिजरेटर, एअर कंडीशनर, स्प्रे, फोम आदि के प्रयोग में कमी लाई जानी चाहिए। इस परत में हुआ क्षरण अब भर चुका है, लेकिन अगर हम सचेत नहीं हुए तो पृथ्वी पर मानव जाति के साथ-साथ अन्य प्रजातियों के लिए भी अंधी विकास की दौड़ और लालची प्रवृत्ति गंभीर खतरा उत्पन्न करेगी। भूगोल वेत्ता डॉ. संतन कुमार राम ने भी विचार रखे। इस परिचर्चा पर आधारित एक क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें बीनू सिंह, रूही फात्मा, अनीशा कुशवाहा, अदिति विश्वकर्मा, अंजली राय, शगुफ्ता जहां आदि छात्राओं ने पुरस्कार जीते। कार्यक्रम का संचालन समरा फिरदौस ने किया।