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घट रहा गंगा का जलस्तर, संक्रमण का खतरा बढ़ा

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गंगा का जलस्तर अब घटने लगा है लेकिन संक्रामक बीमारियों की आशंका बढ़ गई है। जगह-जगह जलभराव, गंदगी और दुर्गंध से लोग परेशान हैं। मच्छरों का प्रकोप है। ऐसे में संक्रामक बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने बाढ़ प्रभावित रहे इलाकों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने की मांग की है।
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केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से गंगा का जलस्तर कम हो रहा है। सोमवार की सुबह 11 बजे तक 63.130 मीटर जलस्तर रिकार्ड किया गया। पिछले दो दिनों में गंगा के जलस्तर में करीब दो मीटर की कमी दर्ज की गई। दूसरी ओर जलस्तर में कमी के बाद जगह-जगह जलभराव और पानी में सड़न से दुर्गंध फैलनी शुरू हो गई है जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। शहर के बंधवा, वेदपुरवा और सिकंदरपुर में बाढ़ से मुक्त हो गए हैं लेकिन रास्ते में कीचड़, गंदगी के चलते दुर्गंध फैल रही है। इससे आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है। बंधवा के मोहन कुमार, वेदपुरवा के गोविंद यादव और सिकंदरपुर के सत्यजीत सिंह का कहना है कि जब से बाढ़ का पानी घटा है। दुर्गंध और गंदगी सड़कों पर फैली रहती है। इससे संक्रामक बीमारी फैलने की गंभीर आशंका है। इसके बाद भी दवाओं का छिड़काव और सफाई की व्यवस्था नहीं की गई।
ग्रामीण इलाकों में रेवतीपुर ब्लॉक के पटकनिया, युवराजपुर, बवाड़े के लोग भी संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका जता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आने-जाने के दौरान नाक मुंह बंद करके गुजरना पड़ रहा है। अभी तक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं हुआ। प्रभावित गांव के लोगों ने बताया कि आपदा राहत व बचाव दल की तरफ से विशेष सहयोग नहीं मिल पा रहा है। वहीं राहत पैकेट के नाम पर महज कोरम पूरा किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जिला को आपदा से प्रभावित घोषित कर हुए नुकसान का सर्वे भी कराना चाहिए जिसके आधार पर लोगों के नुकसान को लेकर राहत पैकेज की घोषणा की जाए।
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