शहर के आईटीआई चौराहा स्थित अस्थाई -गो- आश्रय केंद्र। संवाद
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गाजीपुर। सड़क और खेतों में छुट्टा पशु लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुके हैं। खेतों में किसान और सड़कों पर लोग इन छुट्टा पशुओं से दो चार होते रहते हैं। इस समय सीवान में फसल तैयार है और किसान फसलों को बचाने में अगोरिया करने में जुटा है। क्योंकि छुट्टा पशुओं का ऐसा आतंक है कि ये खड़ी फसलों को चट कर जाने के फिराक में रहते हैं। किसानों का कहना है कि शासन-प्रशासन की ओर से तमाम प्रयासों के बाद भी छुट्टा पशु समस्या का रूप धारण कर चुके हैं। इसका स्थायी समाधान होता नहीं दिख रहा है।
वहीं, जिला प्रशासन की ओर से छुट्टा पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। इनका दावा है कि काफी हद तक इस समस्या पर काबू पा लिया गया है। शासन के निर्देशानुसार, एक जनवरी से 12 जनवरी तक छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाना था। लेकिन जिला पशु पालन विभाग का कहना है कि जिलाधिकारी के निर्देश पर यह अभियान अनवरत जारी है। जिले में 63 टीमों को लगाया गया है। जिनके द्वारा अब तक 913 पशुओं को पकड़ा गया है। अभी 2750 पशुओं को 28 स्थायी और अस्थायी आश्रय स्थलों पर रखा गया है। साथ ही 236 पशुओं का जिम्मा किसानों को दिया गया है।
पशुओं को रोजाना 30 रुपये की दर से भुगतान किया जा रहा है। दिसंबर महीने का 19 लाख 85 हजार 550 रुपए का भुगतान किया जा चुका है। जनवरी के भुगतान की फाइल तैयार हो रही है। 15 फरवरी तक इस महीने का भी भुगतान करा दिया जाएगा।
पशु पालन विभाग का कहना है कि छुट्टा पशुओं की समस्या को देखते हुए ब्लॉक स्तर पर दो-दो अस्थायी आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं। जिनका काम मनरेगा के द्वारा किया जा रहा है। ऐसे ही क्रिटिकल गैप योजना के तहत जिले में अन्य तीन स्थायी आश्रय स्थल बनवाए जा रहे हैं। जिसका निर्माण टांडा, इब्राहीमपुर और मिर्जापुर में किया जा रहा है। इनके गो आश्रय स्थलों के बनने के बाद छुट्टा पशुओं के लिए व्यवस्थाएं बढ़ जाएंगी।
एक जनवरी से शुरू हुए अभियान से काफी हद तक छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात मिली है। अभी अभियान अनवरत जारी है। जहां भी छुट्टा पशु मिल रहे हैं। उनको स्थायी और अस्थायी आश्रय स्थलों में रखा जा रहा है।
एस के रावत, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी