परिषदीय विद्यालयों के एक सितंबर से खुलने की संभावना है। इसको देखते हुए यह तय किया गया है कि कोरोना का टीका लगवाने वाले रसोइयों से ही मध्याह्न भोजन बनवाया जाएगा। जिन रसोइयों ने टीका नहीं लगवाया है, उन्हें भोजन बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
रसोइयों को हलफनामा देना होगा कि उनके परिवार में कोई कोरोना से संक्रमित नहीं है। टीका की पहली डोज लगवाने वाले रसोइया भोजन बनाएगा लेकिन उसे अगली तारीख पर टीकाकरण कराकर स्कूल प्रशासन को सूचित करना होगा। बीएसए हेमंत राव ने दो दिन पूर्व सभी विद्यालयों को इस आदेश से अवगत कराया दिया है। जिले में परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई एक सितंबर से शुरू होने के साथ ही मध्याह्न भोजन बनाने की शुरुआत हो जाएगी। यहां कुल 2269 परिषदीय विद्यालय हैं जिनमें 1468 प्राथमिक, 449 कंपोजिट तथा 352 जूनियर परिषदीय विद्यालय हैं। जहां करीब दो लाख अस्सी हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। मध्याह्न भोजन बनाने के लिए 3300 रसोइयों की तैनाती की गई है। शिक्षा विभाग की ओर से पिछले दिनों कोविड प्रोटोकॉल के तहत रसोइयों की ट्रेनिंग दी गई थी ताकि वे पोषण युक्त भोजन बना सकें।
नई व्यवस्था के तहत रसोइयों को सावधानी बरतनी होगी। बर्तनों की अच्छी सफाई, खाद्यान्न की धुलाई के साथ सफाई बरतनी होगी। भोजन पकाने और परोसने से पहले हाथ धोने होंगे, खाने के बाद बर्तनों की दोबारा धुलाई, रसोइयों के कपड़े साफ होने चाहिए। रसोई में पर्याप्त सफाई होनी चाहिए।
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स्कूलों में नियुक्त रसोईयों को ड्यूटी पर आने से पहले टीकाकरण का प्रमाणपत्र देना होगा। उनसे यह भी हलफनामा लिया जाएगा कि परिवार में कोई संक्रमित तो नहीं है। 90 फीसदी रसोइयों का टीकाकरण हो चुका है। बाकी बचे रसोइयों को भी जल्द टीकाकरण हो जाएगा।-हेमंत राव, बीएसए।