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Ghazipur News: जलमार्ग का फायदा उठा रहे, नाव से पशु और रस्सी से शराब पहंुचा रहे

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सड़कों पर तस्करी के खिलाफ पुलिस की सख्ती देख तस्करों ने जलमार्ग से धंधा शुरू कर दिया है। नाव से पशु और रस्सी के सहारे शराब की तस्करी हो रही है। गंगा और कर्मनाशा से सीमा पार के गांवों में रात से लेकर भोर तक तस्कर सक्रिय रहते हैं।
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पिछले कुछ महीनों से पशुतश्करों ने सड़क की बजाय जलमार्ग को तस्करी के लिए सेफ रूट बना लिया है। जानवरों को गांव के रास्ते पैदल लेकर गंगा के किनारे पहुंचते हैं और वहां मौजूद लोग पशुओं को झाड़ियों में बांध देते हैं। फिर नावों में लादकर गंगा पार ले जाकर पुनः किनारों पर ही झाड़ियों में बांध देते हैं। खेतों से तिरछे ही ऐसे हांक कर ले जाते हैं जैसे फसल नुकसान कर रहे गोवंशों को दूसरे सिवान में ले जा रहे हों।
सैदपुर कोतवाली के फुलवरिया घाट, रामपुरमाझा थाना क्षेत्र के चकेरी और आसपास के इलाके, छपरा मंझरिया सहित करंडा के चोचकपुर, करकटपुर गजाधरपुर और महाबलपुर घाट पशुतश्करों के पशु लादने के सबसे सुरक्षित स्थान है। तश्कर गोवंशों को नावों पर लादकर ले जाने काम करते हैं। पशुओं को चंदौली और जमानिया कोतवाली क्षेत्र के ऐसे गांवों को चिन्हित करते हैं, जो गंगा से सटे हुए हैं। वहां झाड़ियों में बांधकर रात के समय वाहनों पर लादकर बिहार के रास्ते पश्चिम बंगाल तक पहुंचा देते हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि करंडा के गंगा किनारे बसे गांवों सहित करंडा ताल में छुट्टा गोवंश नहीं दिखाई देते, जब कभी 10-20 की संख्या में गोवंश दिखते हैं तो वो दो तीन दिन बाद कहां गायब हो जाते हैं पता नहीं चलता।
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सेवराई: गहरम कोतवाली और दिलदारनगर थाने के इलाके सायर, बरेजी, भतौरा, अमौरा, कैथी, खजुरी, सिहानी ऐसे गांव हैं, जो कर्मनाशा से सटे हुए हैं। नदी में पानी कम रहता है तो एक किनारे से दूसरे किनारे तक रस्सी के सहारे गैलन में शराब बांधकर तस्कर बिहार पहुंचते हैं। जबकि दोनों प्रांतों की पुलिस इस पर अंकुश लगाने में विफल है। यहीं नहीं इन दिनों इन क्षेत्रों में गोतस्करी भी नदी के सहारे बड़े पैमाने पर जारी हैं।
भांवरकोल थाना क्षेत्र का वीरपुर का इलाका गंगा से सटा हुआ है और गंगा नदी बिहार और उतर प्रदेश को बांटती है। ऐसे में गंगा के तटवर्ती इलाकों के झुरमुट में पशुओं को बांधकर रात के अंधेरे और भोर के उजाले में नाव के सहारे बिहार पहुंचाने में सफल रहते हैं। तस्करी के लिए सेफ जोन बने जलमार्ग पुलिस के अंकुश लगाने के तमाम उपायों को धता बताकर तस्कर वारदात को अंजाम देने में जुटे हैं।
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