विधानसभा चुनाव से पहले जिले में सियासी समीकरण भी बदलने लगा है। मऊ विधायक मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी के सपा में शामिल होने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। सिबगतुल्लाह मुहम्मदाबाद सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। वह 2017 में कौमी एकता दल से चुनकर विधानसभा पहुंचे थे। उससे पहले सपा से चुनाव जीतकर आए थे। सपा में शामिल होकर उन्होंने कहा कि ये घर वापसी हुई है।
सिबगतुल्लाह अंसारी के सपा में शामिल होने से किसे कितना फायदा होगा यह तो वक्त बताएगा लेकिन इतना तय है कि सिबगुतल्लाह के सपा में आने से मुहम्मदाबाद सीट का समीकरण भी बदल गया है। अंसारी परिवार के लिए मुहम्मदाबाद सीट घर की सीट है। जो इस परिवार के लिए पूर्वांचल के किसी अन्य सीट पर जीतने से ज्यादा मायने रखती है। अंसारी परिवार की मुहम्मदाबाद क्षेत्र की छोटी बिरादरियों में मजबूत पैठ है। जानकारों का कहना है कि अंसारी परिवार का छोटी जातियों के 25 से 30 फीसदी वोटों पर प्रभाव है। ऐसे ही करीब 30 हजार मुसलिम, पांच हजार यादव और करीब दस हजार भूमिहार वोट भी इनके व्यक्तिगत संबंधों से जुड़े हैं। सपा में आने से पार्टी के परंपरागत 40 हजार यादव वोट भी सिबागतुल्लाह को मिल सकते हैं। सपा में आने से सिबगतुल्लाह की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
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सिबगतुल्लाह के तीन लाइसेंस हुए निरस्त, चल रहे तीन मामले
योगी सरकार में मुख्तार अंसारी परिवार और करीबियों के कुल 84 लाइसेंस निलंबित हुए हैं। इसमें सिबगतुल्लाह अंसारी और उनके बेटे के भी लाइसेंस हैं। एसपी डॉ. ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि सिबगतुल्लाह के पास तीन लाइसेंस थे और इनके बेटे सोहेब उर्फ मन्नू के पास एक असलहे का लाइसेंस था। ये चारों लाइसेंस कारतूस सत्यापन में अनियमितता और आपराधिक मुकदमों की संजीदगी को देखते हुए निरस्त कर थाने में जमा करा लिये गये हैं। वहीं, शहर कोतवाल विमल मिश्रा के मुताबिक, सिबगतुल्लाह अंसारी पर गाजीपुर कोतवाली में तीन मुकदमे दर्ज है। उन पर हत्या का प्रयास, मारपीट, धमकाना एवं अन्य धाराएं लगी हुई हैं।