जिले में गंगा, गोमती, कर्मनाशा और बेसो नदी में उफान से तटवर्ती क्षेत्रों में दुश्वारियां बढ़ गई हैं। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है जिससे तटवर्ती गांवों के लोगों में दहशत है। शहर और सैदपुर के गंगा घाटों की सीढ़ियां डूब गई हैं। निचले इलाकों में पानी भरने किसानों एवं पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई है। गंगा का पानी गांवों में घुस गया है। धर्मपुरा एवं फिरोजपुर गांव के पास स्थित पुल के ऊपर पानी बहने से फिरोजपुर आदि गांवों का संपर्क टूट गया है। प्रशासन ने तटवर्ती क्षेत्र के लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।
औड़िहार : सैदपुर में सभी गंगा घाट डूब चुके हैं। पक्का घाट स्थित शीतला माता और हनुमान मंदिर जलमग्न हो गया है। गंगा के तटवर्ती निचले इलाकों में पानी घुस गया है। पीड़ित पशुओं और सामान के साथ अन्यत्र जाने की तैयारी में हैं। फुलवरिया, टोडरपुर, चकेरी, नारी पचदेवरा, रामपुर मांझा, मंझरिया, बंटरिया, गायघाट, आराजी गंज, मलहिया टोला, कोलुहाटोला, जौहरगंज, औड़िहार, पटना, शादी-भादी आदि गांवों में लोग परेशान हैं। वहीं गोमती नदी में बाढ़ का प्रभाव कुशही, खरौना, सिधौना, सूरजभान चक, बहदिया, गौरी, तेतारपुर, गौरहट, मरबतपुर, गदनपुर, भुजाड़ी, नेवादा, बहुरा आदि गांवों पर पड़ता है। गंगा और गोमती का जलस्तर 2013 एवं 2017 की अपेक्षा दो-तीन फीट नीचे है। अगर दोनों नदियों का पानी बढ़ा तो उक्त गांव प्रभावित होंगे और बाढ़ राहत केंद्रों में शरण लेनी पड़ेगी। प्रशासन ने 27 बाढ़ राहत केंद्रों एवं चार शिविरों की है। नावें लगाई गई हैं और गोताखोर तैनात किए गए हैं।
मौधा: गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। तटवर्ती 14 गांव पानी से घिर गए हैं। औड़िहार स्थित वाराहदेव मंदिर के पास गंगा का पानी आ गया है। रविवार को वराह धाम के पुजारी हरिओम बाबा और लालू महाराज ने गंगा और वराह देव की आरती उतारी। जलस्तर बढ़ने से गोमती ने भी उग्र रूप अख्तियार कर लिया है। गोमती के किनारे पर बसे गांव तेतारपुर से गौरी जाने वाला संपर्क मार्ग डूब गया है जिससे लोगों का संपर्क टूट गया है। ग्रामीमों को पांच किलोमीटर का चक्कर काटकर बहुरा गांव की ओर से जाना पड़ रहा है। वहीं तीन तरफ से पानी से घिरे होने के कारण गौरहट गांव की स्थिति एक टापू जैसी हो गई है।
भांवरकोल: गंगा का पानी मैदानी इलाकों में फैलने लगा है। कई गांव चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं। शेरपुर गा़म पंचायत के धर्मपुरवा भागड़ नाले का पानी आमघाट, महेशपुर, रानीपुर, फखनपुरा, कुंडेसर से आगे तमलपुरा तक खेतों में भर गया। मिर्च, अरहर आदि फसल डूब गई है। धर्मपुरा एवं फिरोजपुर गांव के पास स्थित पुल के ऊपर से पानी बह रहा है जिससे फिरोजपुर आदि गांवों का संपर्क टूट गया है। आवागमन के लिए लोग नाव का सहारा ले रहे हैं। शेरपुर गांव पंचायत का छनबैया, मुबारकपुर, मांघी, पच्चासी, गहमर बांड़ आदि पुरवे पूरी तरह से बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। शेरपुर की ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि जयानंद राय मोनू ने बताया कि अब तक कुल छह नावें लगाई गई हैं। प्रशासन से और नावें और चारे की मांग की गई है।
बारा: कर्मनाशा का पानी तटवर्ती गांवों में समाने लगा है। सेवराई तहसील के ग्राम सभा भतौरा एवं मगरखाई के दर्जन भर से अधिक घरों और झोपड़ियों में पानी घुस गया है। लोग ऊंचे स्थानों पर शरण लेने के लिए विवश हैं। गांवों में विषैले जीव-जंतुओं का खतरा बढ़ गया है। घरों में विषैले जीव घुस रहे हैं।
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इनसेट
फसल डूबने से किसानों में छाई मायूसी
औड़िहार/भांवरकोल/बारा। सैदपुर में गंगा और गोमती दोनों नदियों का तांडव जारी है। दोनों नदियों में बाढ़ के चलते खरीफ और सब्जी की खेती को नुकसान पहुंचने लगा है। सैकड़ों एकड़ बोई गई फसलें जलमग्न है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बाढ़ के चलते दिखाई देने लगी है। मैदानी इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से शेरपुर, नकटीकोल, रानीपुर, फखनपुरा, कुंडेसर आदि गांवों में बडे़ पैमाने पर मिर्च, टमाटर, करेला, लौकी आदि की फसल बाढ़ के पानी में डूबने की आशंका से सब्जी उत्पादक किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है। बारा क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ने से सैकड़ों बीघे में लगी अरहर, ज्वार, बाजरा, मक्का और साग-सब्जी की फसल डूब गई हैं।