क्रय केंद्रों पर धान की खरीद बदइंतजामी के दौर से गुजर रही है। कहीं किसानों को धान में नमी की बात कह कर लौटाया जा रहा है तो कहीं किसानों को एक माह बाद धान लेकर आने की बात कही जा रही है। इसको लेकर किसानों में रोष है। अव्यवस्था को लेकर नाराज किसान अब आक्रोशित होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे हैं।
जिले के सेवराई, जमानिया और दिलदारनगर क्षेत्र में धान खरीद में बदइंतजामी को लेकर किसान खासा परेशान हैं। कई केंद्रों पर धान खरीद की गति बेहद धीमी है तो कुछ केंद्रों पर बेवजह किसानों को एक-एक महीने बाद का समय दिया जा रहा है। इसकी वजह से किसान अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी और मिलरों के बीच सांठगांठ है जिससे किसानों से धान न खरीद कर सीधे मिलरों से खरीदने पर जोर है। ऐसे में किसान औने-पौने दामों पर धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं। जिले में धान खरीद के लिए एक नवंबर को 125 क्रय केंद्र खोले गए। जिले में दो लाख 31 हजार 200 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित है लेकिन 9 दिसंबर तक करीब 18 हजार मीट्रिक टन धान खरीद हो पाई है। ऐसी स्थिति में समय से किसानों की धान की खरीद करना संभव नहीं प्रतीत हो रहा है। धान का कटोरा कहे जाने वाले जमानिया, सेवराई और दिलदारनगर क्षेत्र में किसानों को प्रतिदिन केंद्रों से वापस लौटना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी धान खरीद के नाम पर सिर्फ परेशान कर रहे हैं। कभी एक महीने बाद का समय देते हैं या कभी धान में नमी बता कर लौटा देते हैं।
कोट
इस बार पहले की अपेक्षा सेवराई में सात नए केंद्र के साथ ही बीस केंद्र खोले गए हैं। अमौरा में रखरखाव की व्यवस्था सही नहीं होने के कारण केंद्र नहीं बनाया गया है। संबंधित किसान देवल अथवा किसी भी नजदीकी केंद्र पर अपनी इच्छा अनुसार धान विक्रय कर सकते हैं।-रतन शुक्ल, डिप्टी आरएमओ
धान क्रय न होने के विरोध में प्रदर्शन
सेवराई तहसील क्षेत्र के अमौरा गांव में किसानों से धान क्रय नहीं करने को लेकर किसानों में आक्रोश है। नाराज 25 की संख्या में किसानों ने बृहस्पतिवार को गांव में प्रदर्शन किया। इस दौरान शासन -प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि इस बार अमौरा गांव में धान क्रय केंद्र भी नहीं खोला गया जिससे सैकड़ों किसानों का हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पिछले एक महीने से पड़ा हुआ है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी दी लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
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विभागीय उदासीनता और लापरवाही के कारण अमौरा को इस बार केंद्र नहीं बनाया गया है जिससे किसानों को बिचौलियों के हाथों धान बेचना पड़ रहा है। करीब एक महीने से 500 से अधिक किसान अपने 5000 क्विंटल से अधिक धान नियमित तौर पर खलिहान में विक्रय के आस में रखे हैं और निगरानी कर रहे हैं।-राम नारायण सिंह
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सरकार किसानों के हितैषी होने का दावा तो कर रही है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। कई बार अधिकारियों से क्रय केंद्र की मांग की गई 15 दिन से चक्कर काटने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। क्षेत्र के किसानों को औनेपौने दाम पर धान बेचना पड़ रहा है।-ललित तिवारी
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धान विक्रय न होने के कारण रबी की फसल के लिए हमारे सामने पैसे का संकट है जिससे खेतों की जुताई-बुवाई भी अभी नहीं हो पाई है। यही स्थिति रही तो फसल के लिए हम पिछड़ जाएंगे।-मनोज सिंह
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क्रय केंद्रों के प्रभारी और मिलरों के बीच मिलीभगत है। इससे भी किसानों को परेशान किया जा रहा है ताकि हम अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेच दें। फिर वे मिलरों से खरीद लेंगे।-रिंकू सिंह