कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य महकमा बड़े-बड़े दावे तो कर रहा है, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ अलग है। स्थिति यह है कि सीएचसी मुहम्मदाबाद और भदौरा में अब तक ऑक्सीजन प्लांट स्थापित नहीं हो सका है। कासिमाबाद सीएचसी पर लगा ऑक्सीजन प्लांट संचालित ही नहीं हो सका है। ऐसे में अस्पतालों में बिस्तर तक मरीजों को ऑक्सीजन पहुंचाने का दावा हवा-हवाई साबित होता दिख रहा है।
शहर के गोराबाजार स्थित जिला अस्पताल और मिश्र बाजार स्थित जिला महिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगने के साथ संचालन भी हो रहा है। जिला अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता 200 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्सर्जन की है जिससे 50 मरीजों को आसानी से इसकी सुविधा मिल सकेगी। वहीं 130 ऑक्सीजन सिलिंटर भरकर रखे गए हैं। जिला महिला अस्पताल में प्रति मिनट 333 लीटर उत्सर्जित करता है, जिससे कम से कम 70 से 80 मरीजों को ऑक्सीजन बड़े आराम से बेड तक पहुंचता है। वहीं ग्रामीण इलाकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी ऑक्सीजन प्लांट लगाने काम शुरू हुआ। इसमें सैदपुर और मनिहारी में तो प्लांट लगने के साथ संचालित होना शुरू हो गया, जिसमें सैदपुर में लगे प्लांट से 200 लीटर प्रति मिनट और मनिहारी में भी 200 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन का उत्सर्जन होता है। प्लांट से निकले पाईप लाइन को बेड तक पहुंचाया गया है, जिससे मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर आसानी से मुहैया कराया जा सके।
मुुहम्मदाबाद और भदौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अभी तक प्लांट स्थापित नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि मुहम्मदाबाद में सीएचसी परिसर में जहां सिर्फ अब तक चबूतरा बनाकर छोड़ दिया गया है। वहीं भदौरा सीएचसी पर सिर्फ प्लांट लगने का कक्ष ही बन सका है। साथ ही कासिमाबाद सीएचसी पर लगा ऑक्सीजन प्लांट बिजली की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण अब तक संचालित ही नहीं सका है और न ही उसका अब तक उद्धाटन ही कराया गया है। ऐसे में अगर इन तीन प्रमुख स्थानों के लोगों को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ी तो उन्हें जिला और महिला अस्पताल की शरण लेनी पड़ेगी। यही नहीं थोड़ी सी लापरवाही उनके जीवन के लिए काफी खतरनाक हो सकता है।
मुहम्मदाबाद और भदौरा के लिए अब तक मशीन नहीं आ पाई है। कासिमाबाद सीएचसी पर लगा ऑक्सीजन प्लांट जल्द ही संचालित होगी। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलिंडर एवं कंसंट्रेटर मौजूद है। - डॉ. डीपी सिन्हा, एसीएमओ नोडल