महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल काॅलेज के अस्पताल की पैथोलॉजी से मरीजों को मिलने रिपोर्ट में मनमानी हो रही है। खून की जांच में प्लेटलेट्स काउंट कम दिखाए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। एक डेंगू मरीजों का प्लेटलेट्स काउंट कम दिखा दिया गया। इसके अलावा एक दिन के नवजात की जांच रिपोर्ट में हिमोग्लोबिन और टीएलसी के साथ अन्य काउंट भी देख चिकित्सक पशोपेश में पड़ गए। परिजनों ने जब पुन: जांच रिपोर्ट मांगी तो लैब कर्मी आनाकानी कर रहे।
कमोवेश यही हाल डेंगू, मलेरिया और मियादी बुखार से पीड़ित मरीजों की जांच रिपोर्ट का भी है। बुखार से पीड़ित मरीज के प्लेटलेट्स काउंट की गड़बड़ी की स्थिति यह है कि बाहर के निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर जांच में प्लेटलेट्स काउंट एक लाख के पार दिखाया जा रहा है। वहीं, अस्पताल की रिपोर्ट में यह काउंट 50 हजार के नीचे रह रहा है। दिक्कत यह है कि रिपोर्ट पर विश्वास कर चिकित्सक भी उपचार कर रहे हैं। ऐसे में मरीज की हालत ठीक होने के बजाए बिगड़ती चली जा रही।
शहर निवासी गर्भवती शुभ्रा त्रिपाठी के मामले में परिजन तीन दिनों से तीसरी जांच रिपोर्ट के लिए लैब का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पैथोलॉजी कर्मियों द्वारा कुछ नहीं बताया जा रहा है। ऐसे में अब बाहर निजी पैथोलॉजी में जांच कराने के लिए तीमारदार विवश हैं। वहीं, सकलेनाबाद निवासी युवक के मामले में चिकित्सकों को इलाज के लिए युवक को बाहर से जांच करने की सलाह दी गई। ऐसे में पैथोलॉजी की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार तो मेडिकल कालेज के लैब में इन दिनों अप्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती कर दी गई है, जो मनमाने तौर से जांच रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। यह लापरवाही मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इस संबंध में प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने बताया कि जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी की जानकारी मिली है। जांच कराई जाएगी।
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केस स्टडी- एक
शहर निवासी गर्भवती शुभ्रा त्रिपाठी का चार अक्तूबर की रात प्रसव हुआ। बच्चा हुआ। नवजात की तबीयत खराब होने पर परिजन उसे जिला महिला अस्पताल लेकर गए। बाल रोग विशेषज्ञ ने सीबीसी सहित अन्य जांच के लिए लिखा। नवजात को परिजन बीते पांच अक्तूबर को अस्पताल पहुंचे। जांच के लिए खून दिया। रिपोर्ट लेकर डॉक्टर के पास गए। लेकिन डॉक्टर ही असमंजस में पड़ गए। पुन: जांच के लिए कहा। शाम तीन बजे पुन: जांच रिपोर्ट लेकर परिजन पहुंचे। पहली रिपोर्ट और दूसरी रिपोर्ट में काफी अंतर मिला। इसके बाद तीसरी बार पुन: जांच कराकर रिपोर्ट लेने गए तीमारदारों को आज तक जांच रिपोर्ट नहीं मिली।
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केस स्टडी -2
सकलेनाबाद निवासी एक युवक डेंगू से पीड़ित था। बाहर की जांच रिपोर्ट में उसका प्लेटलेट्स एक लाख से अधिक था। जब अस्पताल पहुंचकर सीबीसी की जांच कराई तो उसका प्लेटलेट्स 47 हजार दिखा दिया गया। टीएलसी का काउंट बढ़ाने के साथ ही अन्य जांच काउंट भी गलत दर्शाए गए। जब युवक ने पुन: बाहर के पैथोलॉजी में जांच कराई तो सभी रिपोर्ट नार्मल और प्लेटलेट्स काउंट भी एक लाख से अधिक था।