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वीर अब्दुल हमीद की शहादत को आज नमन करेगा धामूपुर

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भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 में हुई जंग के अजेय योद्धा वीर अब्दुल हमीद का शहादत दिवस 10 सितंबर को उनके पैतृक गांव धामूपुर में मनाया जाएगा। इसकी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस मौके पर काशी फायर वारियर्स जिमनास्टिक और नेहरू युवा केंद्र की ओर से विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगेे। वीर अब्दुल हमीद ट्रस्ट के बैनर तले सेना में भर्ती होने के इच्छुक युवा जलालाबाद में स्थित वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इस दौरान रेलवे स्टेशन पहुंचकर रेलवे को एक व्हीलचेयर प्रदान किया जाएगा। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा का वर्चुअल कार्यक्रम 11:30 बजे होगा। मुख्य अतिथि लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान होंगे।
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वीर अब्दुल हमीद का जन्म जिले में धामूपुर में एक जुलाई 1933 को हुआ था। 1965 के भारत-पाक युद्ध में वीर अब्दुल हमीद ने सात पैटर्न टैंकों के परखच्चे उड़ा दिया था। दुश्मनों से लड़ते हुए वे 10 सितंबर 1965 को शहीद हो गए थे। परिवार वाले बताते हैं कि युद्ध के दौरान घर से निकलते ही अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी ने उन्हें जाने से रोका था लेकिन वह नहीं रुके। उन्होंने सिर्फ यही कहा था, तुम बच्चों का ख्याल रखना, अल्लाह ने चाहा तो जल्द मुलाकात होगी। रसूलन बीबी का इंतकाल 2 अगस्त 2019 को धामूपुर में ही हुआ था। वीर अब्दुल हमीद पर फिल्मकार चेतन आनंद ने टीवी सीरियल परमवीर चक्र विजेता बनाया जिसमें नसीरुद्दीन शाह ने अब्दुल हमीद की भूमिका निभाई है। आर्मी पोस्टल सर्विस की ओर से वीर अब्दुल हमीद की स्मृति में 10 सितंबर 1979 और 28 जनवरी 2000 को डाक टिकट जारी किया गया था।
उनके प्रपौत्र जमील आलम ने बताया कि दादी का सपना गाजीपुर में सैनिक स्कूल बनवाने का था जो उनके जीते जी पूरा न हो सका। सैनिक स्कूल के लिए जिला मुख्यालय पर जमीन सुरक्षित कर ली गई है और उसका जल्द ही काम भी शुरू होगा। दादी के सपने को साकार करने का प्रयास है।
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धामूपुर में वीर अब्दुल हमीद को लेकर चर्चा के दौरान लोग बताते हैं कि अब्दुल हमीद का मन भले ही पढ़ने में नहीं लगता था, लेकिन वह समय से ही स्कूल जाते थे और अन्य बच्चों को भी पकड़कर समय पर स्कूल पहुंचाते थे। वह चाहते थे कि गांव के सभी बच्चे अच्छी शिक्षा पाएं।
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रसूलन बीबी को प्रदान किया गया था परमवीर चक्र
वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में वीर अब्दुल हमीद की शहादत के एक हफ्ते बाद 16 सितंबर 1965 को भारत सरकार ने देश का सर्वोच्च सैनिक सम्मान परमवीर चक्र देने की घोषणा की। 26 जनवरी 1966 गणतंत्र दिवस पर तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने वीर अब्दुल हमीद की
सन 1965 में जब अब्दुल हमीद शहीद हुए थे, मैं वाराणसी के क्वींस कालेज में बारहवीं का छात्र था। उनकी शहादत की खबर से सभी वाकिफ थे। हमीद साहब काफी दिलेर और जूनूनी व्यक्ति थे। देशभक्ति और समाज सेवा उनकी पहचान थी। वे छुट्टियों में घर आने पर गांव के लोगों के साथ रहना पसंद करते थे। वे हिंदू-मुस्लिम सबके प्रति स्नेह रखते थे। विषम परिस्थितियों में लोगों की मदद करने में पीछे नहीं रहते थे।-ओमप्रकाश सिंह उर्फ धक्का सिंह, धामूपुर
हमारे दादा जी की शहादत हमारे परिवार के लिए प्रेरणादायी है। दादा जी की वीरता और पराक्रम के किस्से देश और समाज की सेवा करने की सीख देते हैं। इससे प्रेरित होकर हमने दादा जी के नाम पर एक ट्रस्ट की स्थापना भी की है।-जमील आलम, अब्द्लु हमीद के प्रपौत्र, धामूपुर
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