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अत्यंत ही सरल प्रवृति के देवता हैं देवाधिदेव भगवान शिव

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जखनिया। सिद्धपीठ हथियाराम मठ में श्रावण मास में अनुष्ठान के चलते वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज रहा है। महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति महाराज के 26वें चातुर्मास अनुष्ठान के दौरान वैदिक ब्राह्मण शिर्वाचन कर रहे हैं जिससे समूचा क्षेत्र शिवमय नजर आ रहा है। इस दौरान यति महाराज ने कहा कि देवाधिदेव भगवान शिव अत्यंत ही सरल प्रवृति के देवता हैं। उनके भोलेपन के चलते ही उन्हें भोलेनाथ भी कहते हैं।
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उन्होंने कहा कि सावन माह में भगवान शिव के रुद्राभिषेक का विशेष महत्व होता है। रुद्राभिषेक में शिवलिंग को गंगा जल, दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, जल, शक्कर और गन्ने के रस आदि से स्नान कराया जाता है। रुद्राभिषेक के बाद बिल्वपत्र, दूब, शमीपत्र, नीलकमल, आक, मदार आदि अर्पित करने से शिवजी प्रसन्न होते हैं। सोमवार को रुद्राभिषेक पूजन के दौरान श्री यति महाराज ने कहा कि इसके साथ ही हरियाली तीज और हरियाली अमावस्या पर भी शिव पूजन का बहुत महत्व है। इसके साथ ही नागपंचमी पर नाग देवता का पूजन करने से भी शिव प्रसन्न होते हैं। बुढ़िया माई एवं भगवान शिव के उपासक महामंडलेश्वर भवानीनंदन यति के भाद्रपद पूर्णिमा तक चलने वाले चातुर्मास में दर्शन-पूजन के लिए जिले सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत चल रहे चातुर्मास अनुष्ठान में आचार्य सुरेश त्रिपाठी के आचार्यत्व में ब्राह्मणों के समूह की ओर से किए जा रहे वैदिक मंत्रोच्चार से समूचा अंचल गुंजायमान है।
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