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दम तोड़ रहीं कृषि रक्षा इकाईयां, किसान शोषण के शिकार

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गाजीपुर। जिले में कृषि रक्षा इकाइयां दम तोड़ चुकी हैं। जिले के 16 कृषि रक्षा केंद्रों पर दो वर्ष से कीट रक्षक दवाएं नहीं हैं। किसानों को बाजार से महंगे दाम पर दवाएं खरीदने के लिए विवश होना पड़ रहा है। इससे उन्हें आर्थिक शोषण का शिकार होना पड़ रहा है। ऐसे में रबी की फसल की सुरक्षा को लेकर अन्नदाता चिंतित हैं।
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करीब दो लाख 53 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर चार लाख आठ हजार किसान खेती करते हैं। उन्हें खाद-बीज और गुणवत्तापूर्ण दवाओं के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए जिले के 16 विकास खंडों पर कृषि रक्षा इकाई स्थापित कराई गईं। जहां से किसान अनुदान पर खरपतवार नाशक, कीटनाशक और फंगस संबंधित दवाएं आसानी से सस्ती कीमत पर उपलब्ध हो सके। साथ ही इन दवाओं को कृषि रक्षा केंद्रों से खरीदने के बदले किसानों को 40 से 60 फीसदी तक अनुदान मिल सके। ऐसे में खरीफ एवं रबी का सीजन आने के बाद इन केंद्रों पर किसानों की भीड़ जुटने लगती थी। इन केंद्रों पर फफूंदी नाशक और फसल के पीला पड़ने से भी सुरक्षा होती थी, जबकि दो वर्ष से यह केंद्र निष्क्रिय बने हुए हैं। दवाओं का टोटा होने से किसान परेशान हैं। स्थिति यह है कि अब इन केंद्रों पर दवाएं आनी बंद हो चुकी है। ऐसे में दवाओं पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ भी उन तक नहीं पहुंच रहा है। अधिसंख्य केंद्रों पर ताला लटक चुका है। किसानों को बाध्य होकर बाजार से अधिक दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। कमोवेश यही हाल किसानों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं और अनुदान का भी है। सिर्फ मौखिक और कागजी खानापूर्ति करके विभाग के अधिकारी पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।
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