रीयल एस्टेट रेग्युलेटरी बिल (रेरा) लागू होने बाद बिल्डरों के धोखे से बचाने के लिए सिर्फ एक वेबसाइट ही काफी होगी। बिल लागू कराने वाली अथॉरिटी की इस वेबसाइट पर काम शुरू करने से पहले बिल्डर को अपने प्रोजेक्ट का पूरा ब्यौरा देना होगा।
अथॉरिटी में रजिस्ट्रेशन के बाद ही बिल्डर काम शुरू कर सकेंगे। प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन नंबर को फीड करते ही ग्राहक को बिल्डर प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी मिल जाएगी। वेबसाइट के जरिए लोग अपनी शिकायतें भी दर्ज करा सकेंगे।
बिल्डर प्रोजेक्ट्स में घर खरीदने वालों के हितों की रक्षा के लिए रेरा बिल दोनों सदनों से पास हो चुका है। बिल को जल्द ही राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। बिल लागू होने के बाद फ्लैट्स खरीदने वालों को बिल्डरों की धोखेबाजी से राहत मिलेगी।
बिल के प्रावधानों के बारे में हाईकोर्ट के एडवोकेट प्रशांत यादव ने बताया कि बिल लागू होने के बाद बिल्डर कंपनी को प्रत्येक प्रोजेक्ट के लिए अलग से एकाउंट खोलना होगा। इस एकाउंट के जरिए ही उस प्रोजेक्ट से जुड़े सभी लेनदेन होंगे। किस मद में प्रोजेक्ट का पैसा खर्च किया, इसकी भी डिटेल वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।
ऐसा होने के बाद एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे में नहीं लगाया जा सकेगा। आरडब्ल्यूए फेडरेशन गाजियाबाद के चेयरमैन कर्नल टीपी त्यागी ने बताया कि वेबसाइट के जरिए लोग अपनी शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे। हर तीन माह में प्रोजेक्ट की डिटेल अपडेट होगी। पूरी व्यवस्था पारदर्शी हो जाएगी।
गाजियाबाद में बढ़ सकती प्रापर्टी की कीमतें
रीयल एस्टेट जानकारों का मानना है कि बिल लागू होने के बाद प्रापर्टी की कीमतों में उछाल आ सकता है। खेल पर पूरी तरह से अंकुश लगने के बाद सही बिल्डर कंपनियां ही प्रोजेक्ट बना सकेंगी। सीमित संख्या में फ्लैट्स बनने, कंपाउंडिंग, सुपर-कारपेट एरिया का खेल बंद होने से बिल्डर निश्चित मुनाफे पर फ्लैट्स की बिक्री करेंगे।