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यूपी में चल रही थी सेना में भर्ती तभी पहुंची गांधीजी की चिट्ठी

Thu, 15 Aug 2013 12:26 AM IST
संभल/ब्यूरो
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आजादी से पहले 1940-41 में ब्रिटिश और चीन की सरहदों पर माहौल गर्म हो गया। भारतीयों पर जुल्म ज्यादती करने के वाले अंग्रेज हुक्मरानों ने भारतीय युवाओं को अपनी सेना में भर्ती करना शुरू किया था।
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उत्तर प्रदेश में जिसका कैंप संभल की तहसील पर भी लगाया गया था। उसी दौरान महात्मा गांधी की चिट्ठी आ गई। जिससे उन्होंने भर्ती का विरोध किया। जिससे अंग्रेजों में पांच मई-1941 को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया।

संभल के 98 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेमपाल रस्तोगी से जब आजादी की लड़ाई के बारे में पूछा गया तो बूढ़ी आंखें शून्य में निहारने लगी। भुजाएं फड़कने लगी। वह बोले कि अंग्रेजी हुक्मरानों के बहकावे में संभल के कई लोग भी युवाओं को अंग्रेजी सेना में भर्ती के लिए उकसाने लगे थे।
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भर्ती कैंप में युवा पहुंचने भी लगे थे लेकिन तभी महात्मा गांधी का एक गोपनीय चिट्ठी की प्रतियां सभी जगह क्रांतिकारियों द्वारा बांटी जाने लगी। जिसमें लिखा था कि अंग्रेजों को रुपये पैसे व आदमियों की जरूरत हैं, हमें इसका विरोध करना है।

इसके बाद उन्होंने अपने साथियों के साथ भर्ती का विरोध किया। पांच मई, 1941 को एक दरोगा गिरिराज सिंह उन्हें मैनाठेर बुलाकर ले गया। जहां क्रांतिकारियों ने नारेबाजी शुरू कर दी, तो उनके साथ दस व्यक्तिगत सत्याग्रहियों को गिरफ्तार कर लिया।

महीनों जेल में रहने के बाद थोड़े थोड़े लोगों को रिहा किया गया। जब उन्हें रिहा करने का मौका आया तो फिर नारेबाजी हो गई। लेकिन उसके महीनेभर बाद उन्हें बाहर कर दिया गया।

आजादी के बाद सोचा था कि अपनी सरकार होगी तो सभी कुछ ठीक होगा। पहले नारा था कि स्वदेशी अपनाओ - विदेशी भगाओ, लेकिन अब ठीक उल्टा हो रहा है। यह देख और सुनकर अंतरात्मा को बहुत कष्ट होता है।
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