फिरोजाबाद। विधायक जी चार दिन पूर्व नालियों से सिल्ट निकाली गई थी, जो आज तक नहीं उठ सकी। आप ही बताओ क्या करें। शहर का नागरिक बनने से तो अच्छा ग्रामीण थे। खुली हवा में सांस लेते थे। अपना दर्द प्रधान से बयां करते थे। समस्या का निस्तारण हो जाता था। यहां तो सब साहब है। सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा। बच्चों की मौत की खबरे सुन-सुनकर अब तो अपने आप से भी डर लगने लगा है। आप बताओ। क्या करें। अपनी व्यथा किसे सुनाए। कुछ करो। जिससे बच्चों की मौतों का सिलसिला थम सके। यह दर्द भगवान नगर, पीपलनगर, चौक मोहल्लें के लोगों का है। जहां डेंगू से हर रोज मौतें हो रही है और नगर निगम के अफसर इन क्षेत्रों के बारे में सुध तक नहीं ले रहे।
बृहस्पतिवार को पीपलनगर और रहना क्षेत्र में डेंगू से हुई बच्चों की मौत की खबर पर पीड़ित परिजनों को सांत्वना देने के सदर विधायक रात करीब नौ बजे पहुंचे। पीड़ित परिजनों को सांत्वना देकर लौट रहे नगर विधायक को भगवान नगर टावर वाली गली में लोगों ने रोक लिया। लोगों का कहना था कि चार दिन पूर्व नगर निगम के कर्मचारियों की ओर से नाली सफाई के दौरान सिल्ट निकाली गई थी, जो आज तक नहीं उठ सकी है। सफाई व्यवस्था भी चौपट है। क्षेत्रीय लोगों को विधायक ने आश्वासन देकर शांत करा दिया।
इसके बाद विधायक पीपलनगर दिवाकर वाली गली में पहुंचे। यहां संदीप नामक बालक की मौत हो गई थी। क्षेत्रीय लोगों ने नगर विधायक को बताया कि यहां न तो गली में झाड़ू गलती है और न ही नालियां साफ होती। साफ सफाई के लिए लोगों ने अपना अपना दिन निर्धारित कर लिया है। किस दिन किसको नाली साफ करनी है और सड़क पर झाड़ू लगनी है।
यह कार्य तो हम लोग कर लेते है। लेकिन गंदगी से पटे प्लॉटों की सफाई कौन करें। प्लॉटों में गंदगी के ढेर लगे है। इससे दुर्गंध फैल रही है। बीमारियां जन्म ले रही है। कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। आप बताओ क्या करें। इससे तो अच्छे शहर का नागरिक बनने से ग्रामीण थे।
बंबा बाईपास मार्ग पर भी चौपट है सफाई व्यवस्था
ककरऊ कोठी से लेकर आसफाबाद तक बंबा किनारे सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। लालपुर के पास नाले किनारे दोपहर दो बजे तक गंदगी के ढेर लगे थे। आवारा जानवर उसमें लोट रहे थे। सैलई चौराहा और अब्बासनगर को जाने वाले मार्ग पर भी जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे नजर आ रहे थे। जाटवपुरी चौराहा से लेकर नैनी ग्लास चौराहा तक सर्विस रोड की स्थिति काफी खराब थी। लोग गंदगी के बीच जीवन यापन करने को विवश हो रहे थे।