बच्चों में योगाभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ाने की हो रही कोशिश
ऑनलाइन शिक्षा से बच्चों की ग्राह्य क्षमता भी घटी, अतिरिक्त कक्षाएं भी लगाई जा रहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिकोहाबाद(फिरोजाबाद)। कोरोना संक्रमण के वक्त स्कूल बंद थे, उस वक्त ऑनलाइन शिक्षा ही एकमात्र विकल्प थी। अब जब स्कूल खुलने के बाद बच्चे कक्षाओं में पहुंच रहे हैं तो विद्यार्थियों में आत्मविश्वास में कमी दिख रही है। ऐेसे में उनका मनोबल बढ़ाने के लिए स्कूलों में योगाभ्यास भी कराया जा रहा है। अतिरिक्त कक्षाएं भी चलाई जा रही हैं।
ब्लूमिंग बड्स सीनियर सेकेंड्री स्कूल के डायरेक्टर राज पचौरी ने बताया कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई तो हुई, लेकिन न तो अध्यापक और न ही बच्चे अपनी शत प्रतिशत प्रतिभा प्रदर्शन नहीं दे पाए। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों में कई कमियां भी आ गईं हैं। वे पहले जैसे अनुशासित नहीं रहे। लगातार चार घंटे कक्षा में बैठने की आदत भी छूट गई है। वे बच्चों से संवाद करके उनका मनोबल बढ़ा रहे हैं। नियमित रूप से योगाभ्यास और ध्यान का भी सहारा लिया जा रहा है। इससे धीरे-धीरे बच्चों में सुधार भी दिख रहा है।
- कोरोना काल में घरों में कैद रहने से मन में हीन भावना बढ़ रही थी। स्कूल खुलने के बाद स्कूल में आकर अब बहुत अच्छा लग रहा है। - रितिका यादव
- ऑनलाइन पढ़ाई अच्छी नहीं हो पा रही थी। शिक्षकों से पढ़ाई के साथ व्यवहारिक बातें कर रहे हैं, जिससे आत्मविश्वास बढ़ रहा है। - वैष्णवी मित्तल
- ऑनलाइन पढ़ाई के लिए समय से पहले तैयार होकर बैठना पड़ता था। मोबाइल पर पढ़ने से आंखों में भी कई तरह की समस्या सामने आई। - हर्षित कुलश्रेष्ठ
- ऑनलाइन पढ़ाई में कभी नेटवर्क की परेशानी थी। कभी कुछ समझ नहीं आता था तो उसे पूछ नहीं पाते थे। ऑफलाइन पढ़ाई में शिक्षण का बेहतर माहौल मिल रहा है। - देवांश पाराशर
- कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षा में विद्यार्थियों को जो भी सिखाया गया उतना बच्चे सीख नहीं पाए। विद्यार्थियों को स्कूल शिक्षण में दोबारा से रिवीजन कराने की आवश्यकता पड़ी। हमने देखा कि बच्चों से आमने-सामने बेहतर तरीके से संवाद कर जटिल से जटिल विषय को सरलता से समझाया जा सकता है। बच्चों की समस्याओं को समझ कर उनको दूर करके सकारात्मक ऊर्जा का संचार कराया जा रहा है।
- अनुज दीक्षित, शिक्षक