फिरोजाबाद। दिवाली का त्योहार मिठाई के बिना अधूरा है। जिले में दिवाली पर मिठाई की डिमांड 80 गुना तक बढ़ जाती है। ऐसे में मुनाफाखोर भी सक्रिय हो जाते हैं और मिलावटी मिठाइयों की जमकर बिक्री की जाती है। रंग-बिरंगी और सिंथेटिक दूध से बनीं मिठाइयां आम आदमी की सेहत को खराब कर देती हैं। ऐसे में त्योहार पर मिठाई खरीदते समय सावधानी बरतें।
दिवालर और अन्य त्योहारों पर मिठाई की डिमांड बढ़ जाती है और मिलावटखोर इसका फायदा उठाते हैं। त्योहार पर मिलावट चरम पर होती है। मिठाइयों के लिए दूध, मावा की मांग काफी होती है। ऐसे में सिंथेटिक दूध और मावा खूब तैयार किया जा रहा है।
दूध की कमी और अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मावा बनाने के लिए दूध की बजाय दूध पाउडर, रसायन, उबले आलू, शकरकंदी, रिफाइंड तेल का प्रयोग किया जाता है। सिंथेटिक दूध बनाने के लिए पानी में डिटर्जेंट पाउडर, चिकनाहट लाने के लिए रिफाइंड और एसेंट पाउडर डालकर दूध बनाया जाता है। हाल में ही जिले में सिंथेटिक दूध बनाने के कई मामले पकड़े भी चुके हैं।
ऐसे करें दूध का परीक्षण
मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी बीएस कुशवाहा ने बताया कि एक साफ सतह पर दूध की एक बूंद डालें। यदि दूध बिना निशान छोड़े तुरंत बर्तन से गिर जाता है तो मिलावटी है। उन्होंने बताया कि शुद्ध दूध या तो रुकता है या धीरे-धीरे सफेद निशान छोड़ता है। वहीं दूध और पानी की समान मात्रा लेकर इसे अच्छी तरह से हिलाएं। यदि दूध में मिलावट है तो झाग उठ जाएंगे।
ऐसे करें मावा का परीक्षण
- थोड़े से पानी में मामूली मावा को सैंपल बतौर उबालें।
- इस मिश्रण को ठंडा करें। अब इसमें आयोडीन की 2-3 बूंदें डालें।
- यदि मिश्रण नीले रंग में बदल जाए, तो इसमें मिलावट है।
मिठाइयों की दुकानों पर नहीं लिख रहे एक्सपायरी
मिलावटी मिठाई के साथ बासी मिठाई भी नुकसानदेह होती है। ऐसे में शासन के आदेश हैं कि मिठाई की ट्रे के साथ डिब्बे पर निर्माण तिथि और एक्सपायरी अवश्य लिखें। हालांकि शहर के प्रमुख मिष्ठान विक्रेता आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं।
- शासन के निर्देशन पर मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय टीमें नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज रही हैं। त्योहार पर टीमें गठित कर छापे मारे जाएंगे। यदि मिलावट की आशंका है तो गुप्त तरीके से विभाग को सूचित करें। लोग रंगीन मिठाइयों के सेवन से बचें।
डॉ. सुधीर कुमार, जिला अभिहित अधिकारी