पाठ्यसामग्री हुईं महंगी,अभिभावकों की जेब पर बढ़ा भार
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। बढ़ती महंगाई का असर नौनिहालों के स्कूल बैग पर भी दिखने लगा है। बीते सत्रों की अपेक्षा कॉपी, किताबें, स्टेशनरी लगभग 20 से 25 प्रतिशत अधिक दाम पर मिलने से अभिभावक खासे परेशान हैं।
कागज के दामों में हुई वृद्धि का असर बच्चों के स्कूल बैग पर भी दिख रहा है। बीते दो वर्षों से विद्यालय बंद रहने के बाद भी स्कूली फीस की मार झेल रहे अभिभावक अब कॉपी व किताब के बढ़े मूल्य से परेशान हैं। बीते वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष कॉपियों के दामों में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। किताबों के दामों में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ब्रांडेड कंपनियों ने कॉपियों के दाम बढ़ाने की अपेक्षा कॉपियों के पेज कम कर दिए हैं। वहीं कुछ कंपनियों ने लंबाई व चौड़ाई कम कर दी है। उदाहरण के तौर पर 128 पेज की कॉपी 120 पेज की कर दी गई है। कुछ कंपनियों ने पेज कम करने के साथ ही मूल्य भी बढ़ा दिए हैं। पहले 64 पेज की जो कॉपी दस रुपये में आती थी वह अब 48 पेज की होने के साथ ही 15 रुपये में मिल रही है। स्टेशनरी विक्रेता इसकी मुख्य वजह कागज की कीमतों में हुई वृद्धि बता रहे हैं।
कॉपियों के दामों ने मारी भारी छलांग
164 पेज की कॉपी पहले 30 रुपये में आती थी जिसका दाम बढ़कर अब 35 से 40 रुपये हो गया है। 28 पेज की कॉपी पांच रुपये में आती थी जो अब 20 पेज की होने के साथ ही आठ से दस रुपये में आ रही है। दस रुपये वाली कॉपी पेज कम होने के बाद भी 15 रुपये में बेची जा रही है। रफ कॉपी पहले काले पेज की 20 रुपये में आती थी इसके दाम अब बढ़कर 25 से 30 रुपये हो गए हैं। इसी प्रकार 192 पेज की कॉपी 25 से 35 रुपये में बिक रही है। 120 पेज की कॉपी पहले 15 रुपये की थी वह अब 20 रुपये में बिक रही है।
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किताबों के दाम में हुई वृद्धि पर नजर.
अलग-अलग स्कूलों की कक्षा दो से पांच तक की आर्ट एंड क्राफ्ट की किताबें 240-280 रुपये में बिक रही हैं। इन किताबों में पेज की संख्या काफी कम है। इंग्लिश रीडर, इंग्लिश लैैंग्वेज की किताब 180-220, गणित की किताब 280-330, विज्ञान की किताब 350-400, हिंदी की किताब 230-280, सामाजिक विज्ञान की किताब 299-335, कंप्यूटर बुक 200-225, सामान्य ज्ञान की किताब 200-240, मोरल साइंस की किताब 240-260, कर्सिव राइटिंग बुक 150-180 और राइटिंग (हिंदी) की बुक 110-130 रुपये तक बेची जा रही है। इसमें ज्यादातर किताबें लोकल प्रकाशकों की हैं।
प्रिंटिग व स्याही पर जीएसटी बढ़ने से बढ़ी परेशानी
जानकारों के अनुसार, अभिभावकों को अपने बच्चों की कॉपी व किताब खरीदने के लिए छह हजार से 12 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। वैसे तो किताबें जीएसटी से मुक्त हैं, लेकिन प्रिंटिंग में प्रयोग होने वाली इंक व कागज पर भारी भरकम जीएसटी लगने से किताबों पर भी महंगाई की मार पड़ रही है। इस वर्ष कागज पर 12 प्रतिशत व इंक पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। अबकी बार किताबें 15 से 20 प्रतिशत तक महंगी होने से अभिभावकों का बजट बिगड़ रहा है।
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परेशानियों का करना पड़ रहा सामना
कॉपी व किताबों के दामों में भारी वृद्धि हुई है। जिससे अभिभावकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। इस समस्या का शीघ्र समाधान निकाला जाए। जिससे अभिभावकों को राहत मिल सके।
- मोनिका जैन, अभिभावक।
हर साल न बदला जाए पाठ्यक्रम
निजी स्कूल प्रतिवर्ष अपनी किताबों के पाठ्यक्रम में कुछ न कुछ बदलाव कर देते हैं। जिससे पुरानी किताबें अच्छी हालत में होने के बाद भी नए विद्यार्थियों के उपयोग में नहीं आ पाती हैं। प्रतिवर्ष छात्र-छात्राओं को नई किताबें खरीदने के लिए विवश होना पड़ता है। इससे निजात मिलनी चाहिए।
- विमल कुमार, अभिभावक
कागज और प्रिंटिंग होने की वजह से किताबों पर 20 फीसदी की महंगाई है। कॉपियों के रेट नहीं बढ़े, मगर उनके पेज घट गए हैं। यानि कॉपी भी महंगी हो गई है।
- विजय कुमार, शर्मा बुक सेंटर कोटला रोड
बीते वर्ष के मुताबिक इस साल 20 से 25 फीसदी तक किताब, कॉपियों और अन्य पाठ्य सामग्री पर महंगाई है। कई पब्लिकेशन ने किताबें छापी नहीं हैं। क्योंकि कोरोना में उन्हें नुकसान हुआ था।
- नीरज शर्मा, शारदे पुस्तक भंडार, जलेसर रोड
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एनसीआरटी की किताबों से स्कूलों में पढ़ाई कराने के निर्देश हैं, एनसीआरटी की किताबें अन्य प्रकाशनों से काफी सस्ती होती हैं, किसी अभिभावक को स्कूल संचालक बाध्य नहीं कर सकता है कि वह उस स्कूल या दुकान से ही किताबें ले। अगर कोई स्कूल संचालक दूसरे प्रकाशन की किताबें खरीदने पर बाध्य करता है, तो इसकी शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
- बालमुकुंद प्रसाद, डीआईओएस