फिरोजाबाद। कांच चूड़ी कारखानों की चिमनियों और वाहनों से निकलने वाले धुएं के साथ ही सुहागनगरी की हवा को खराब कर रहे कारकों की रोकथाम के लिए अब कड़ी कवायद होगी। जिम्मेदार विभागों को वार्षिक कार्ययोजना की जगह तिमाही योजना बनाकर हवा में घुलनशील तत्वों की पहचान और निराकरण कराना होगा। इस पूरी कवायद पर एनजीटी की नजर रहेगी।
टीटीजेड में वायु गुणवत्ता सुधार को वार्षिक कार्ययोजना तैयार की जाती थी। हालांकि उसके परिणाम जल्द सामने नहीं आ पाते थे। इस कारण वायु गुणवत्ता को हानि पहुंचाने वाले कारकों पर अकुंश नहीं लग पा रहा था। ऐसे में अब तीन-तीन माह की कार्ययोजना बनाकर वायु प्रदूषण की रोकथाम की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से एनजीटी को रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
इन विभागों पर वायु गुणवत्ता सुधार का दायित्व-
- संभागीय परिवहन विभाग, वन विभाग, नगर निगम, यातायात पुलिस, कृषि, उद्यान, स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी, पंचायतीराज, स्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कार्ययोजनाओं की मॉनीटरिंग व रिपोर्ट संकलन का जिम्मा दिया गया है।
वायु मॉनिटिरिंग केंद्र की रिपोर्ट 30 मई तक
- तिलक नगर केंद्र पर 276 आरएसपीएम
- स्टेशन रोड केंद्र पर 290 आरएसपीएम
- सीडीजीआई जलेसर केंद्र पर 286 आरएसपीएम
हवा है जहरीली
वायु में घुलनशील हानिकारक तत्वों में शुमार आरएसपीएम की मात्रा सामान्य अनुपात 150 से लेकर 180 आरएसपीएम के बीच होना चाहिए। हालांकि फिरोजाबाद में लगे तीन वायु मॉनिटिरिंग केंद्र पर इसके आंकड़े बेहद खराब है।
कार्ययोजनाओं पर सख्ती से अनुपालन कराने की तैयारी-
वायु गुणवत्ता सुधार के लिए हो रहे प्रयासों अथवा कार्ययोजना का अब सख्ती से अनुपालन कराया जाएगा। हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयास धरातल पर दिखेंगे। वायु गुणवत्ता से जुड़ी कार्ययोजना मार्च में एनजीटी को भेजी थी। सभी विभागों को अब आगामी तिमाही के लिये कार्य योजना बनाने को पत्र लिखे हैं।
डॉ. मनोज कुमार चौरसिया
क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड