फिरोजाबाद। सब्जियों का राजा आलू की कम निकासी किसानों को कहीं रंक न बना दे। इस सीजन में कोल्ड स्टोरेज से यदि आलू की निकासी इसी गति से होती रही तो फिर अंतिम दिनों में आलू की कीमत काफी कम हो जाएगी, क्योंकि बाजार में पहाड़ी आलू ने दस्तक दे दी है। पिछले वर्ष पहाड़ी आलू के नहीं आने के कारण आलू 45 से 50 रुपये प्रतिकिलो ग्राम की दर से बिक गया था। आलू उत्पादक किसान यदि पिछले वर्ष की भाव लेने के लिए आलू को रोकें तो हानि हो सकती है।
जिले से आलू प्रदेश के विभिन्न मंडियों के साथ-साथ मध्य प्रदेश की नासिक, दिल्ली के साथ जयपुर की मंडियों तक में यहां से आलू जाता है। चिप्स बनाने वाली कंपनियां तक फिरोजाबाद के सिरसागंज क्षेत्र के किसानों से सीधे संपर्क करके अच्छे आलू की खरीद करतीं हैं। सब्जियों के राजा कहे जाने वाले आलू की फसल ने गत वर्ष आलू उत्पादक किसानों को राजा बना दिया था।
उम्मीद से अधिक दरें सही मिलने के कारण इस बार किसान पिछले वर्ष की तुलना में अच्छी रेट मिलने की आस लगाए बैठा है लेकिन जिस प्रकार से बाजार में हल्द्वानी आलू के साथ अन्य प्रजाति के आलू की आवक हुई है उससे आलू की रेट और अधिक बढ़ने की संभावना कम हो गई है। कोल्डस्टोरेज संचालकों ने तो किसानों पर आलू निकासी के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है लेकिन किसान रुचि नहीं ले रहे हैं। उद्यान विभाग के आंकड़ों की मानें तो अभी तक 28 प्रतिशत आलू निकासी हो सकी जबकि पिछले वर्ष 37 से 40 प्रतिशत तक आलू की निकासी हो गई थी।