घटना स्थल पर जांच करती पुलिस। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
असोथर। रामबाबू और रुक्मिणी के संबंध जगजाहिर थे। इसके चलते रुक्मिणी के पति छत्रपाल को डर था कि कहीं पत्नी अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसकी हत्या न करा दे। लिहाजा उसने गांव की छोड़ दिया था। वह अपने 16 साल के बेटे किशन के साथ बंगलूरू में रहकर मजदूरी करता था। वह कभी कदार गांव आता भी था तो अपने घर जाने के बजाय रिश्तेदारों से मिलकर लौट जाता था।
गांव में रुक्मिणी 12 बेटे के साथ अकेले रहती थी। दोनों एक साथ घूमते-फिरते थे। गांव वाले या फिर परिवार का कोई सदस्य टोका-टाकी करता तो दोनों उससे भिड़ जाते थे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें लगता था कि उनकी प्रेम कहानी ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है। इसका अंजाम बुरा ही होना था।
रामबाबू के बेटे मुकेश ने बताया कि दो साल पहले उसकी बहन की शादी थी। बरात आने से दो दिन पहले ही पिता रुक्मिणी को लेकर गांव से चले गए थे। कुछ दिन बाद दोनों लौट आए थे। मुकेश का कहना है कि मां की मौत के बाद से ही पिता के रुक्मिणी से संबंध हो गए थे। बीती 16 जून को भाई रिंकू थी शादी थी, जिसमें पिता ने हिस्सा नहीं लिया था। महिला की वजह से उनका परिवार से नाता ही खत्म हो चुका था।
रामबाबू के तीन पुत्र मुकेश, रिंकू, सोनू और तीन बेटियां सुलेखा, रेनू, रिंकी हैं। बड़े दो पुत्र और दो पुत्रियां शादीशुदा हैं। परिजनों का कहना है कि पिता के महिला से करीब 15 सालों से अवैध संबंध हैं। दोनों को अपने परिवारों की भी परवाह नहीं थी। उनके संबंधों को लेकर गांव में चार-पांच बार पंचायतें भी हो चुकी हैं, लेकिन वे एक-दूसरे से अलग होने को राजी नहीं थे।
पुलिस का मानना है कि रामबाबू ने पहले शराब पीकर रुक्मिणी के साथ मारपीट की होगी। चोट के निशान भी महिला के शरीर पर मिले हैं। फिर उसी की साड़ी से उनका गला दबाकर हत्या की, इसके बाद स्वयं भी उसी साड़ी से फंदा लगाकर जान दे दी। ग्रामीणों के मुताबिक रामबाबू काफी उग्र स्वभाव का था और शराब पीने के बाद अक्सर लड़ाई-झगड़े भी किए करता था।