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दाम बढ़ने की आशंका पर डीजल-पेट्रोल की बिक्री बढ़ी

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फतेहपुर। रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध की वजह से डीजल-पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी होने की आशंकाएं लोगों को सता रही हैं। इसके चलते लोगों के बीच पेट्रोल-डीजल भरवाकर रखने की होड़ मची है। किसान गेहूं की फसल की कटाई-मड़ाई के लिए डीजल भर रहे हैं तो शहरवासी जेब का बोझ कम करने की कोशिश में हैं।
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रूस-यूक्रेन युद्घ और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ने की आशंकाएं जताई जा रही हैं। इससे अधिक से अधिक मात्रा में डीजल और पेट्रोल खरीद लेने की होड़ मची हुई है। किसान ड्रमों में डीजल भराकर ले जा रहे हैं, जिससे कि गेहूं की कटाई के समय महंगे दाम पर डीजल न लेना पड़े और पैसों की बचत हो। इस जद्दोजहद से सिर्फ किसान ही नहीं आम आदमी भी परेशान है। दिनभर दो पहिया वाहनों से चलने वाले लोग भी पेट्रोल की कीमत बढ़ने की संभावना से चिंतित हैं। पेट्रोल पंप में बाइक की टंकी फुल कराने वालों की लाइन लग रही है।
बोले किसान और पंप संचालक ...
मवइया गांव के किसान विमल बताते हैं कि गेहूं कटाई का वक्त नजदीक है और ऐसे में डीजल के दाम बढ़ गए तो मुनाफे से रकम चली जाएगी। जितनी बचत होनी है, उसका बड़ा हिस्सा डीजल में ही चला जाएगा तो बाकी के खर्चों का क्या होगा। इसलिए अभी से डीजल लेकर रख लेना मजबूरी है।
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यहीं के अशोक कुमार ने बताया कि बाजार में यह स्थिति है कि डीजल रखने के ड्रम तक की कालाबाजारी की जा रही है। 220 लीटर का जो ड्रम पिछले महीने तक 600 से 700 रुपये में मिल जाता था, अब वह ढूंढने से भी नहीं मिल रहा है। जिनके पास हैं भी वह एक हजार रुपये मांग रहे हैं।
थरियाव हाईवे में पेट्रोल पंप संचालक शिवम पांडेय ने बताया कि आईओसी ने इस स्थिति को ‘पैनिक परचेज’ नाम दिया है। लोग दाम बढ़ने के डर से डीजल-पेट्रोल खरीदकर रख लेना चाह रहे हैं। पंप में औसत रूप से आम दिनों की अपेक्षा बढ़ रही भीड़ इस बात की पुष्टि करती है कि लोग दाम बढ़ने की आशंका से डरे हैं।
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गाजीपुर रोड पर पंप संचालक और आईओसी पंप संचालक एसोसिएशन के प्रवक्ता सुरेश शुक्ल कहते हैं कि पंप संचालकों को डिपो से ही डीजल की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं की जा रही है। 13 लाख रुपये में 12 हजार लीटर डीजल का एक टैंकर बुक होता है। दो-दो टैंकरों का पैसा जमा होने के बावजूद सप्लाई नहीं मिल पा रही है।
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