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पानी उतरा तो दिखने लगी तबाही

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फतेहपुर। बाढ़ का पानी जैसे-जैसे उतर रहा है, तबाही दिखनी शुरू हो गई है। करीब सात हजार बीघा फसल बाढ़ के कारण बर्बाद हो गई है। सबसे ज्यादा नुकसान अरहर, उरद और तिल की फसल को हुआ है। यमुना के तराई क्षेत्र में लगी सब्जी की फसल भी तबाह हुई है। किसानों के सामने अब घरेलू खर्च और परिवार को पालने का चिंता सता रही है।
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यमुुना का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। पिछले 24 घंटे में 95 सेमी पानी कम हुआ है और यमुना का जलस्तर अब खतरे के निशान से नीचे आ गया है। रविवार रात से बंद हुआ बांदा-कानपुर स्टेट हाईवे पर वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है और गांव की गलियों से बाढ़ का पानी भी खत्म हो गया है। इससे लोगों को राहत तो मिल गई है, लेकिन किसानों की बर्बादी का मंजर भी दिखाई देने लगा है।
जिन किसानों ने जून, जुलाई के महीने में तिल, अरहर और उरद की फसलें बोई थीं, वह बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो गई हैं। सावन के महीने में दिखने वाली हरियाली यमुना की बाढ़ निगल गई। पानी हटने के बाद खाली खेत दिखाई दे रहे हैं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को यमुना का जलस्तर 101.20 मीटर पर था, जो गुरुवार को घट कर 99.35 मीटर पर है।
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मवेशियों को हरे चारे का संकट
बारिश के महीने में खेतों में हरियाली दिखने लगती है। हरे चारा की बुआई करते हैं और मवेशियों का पेट भरते हैं। जो किसान हरे चारा की बुआई नहीं करते हैं, वह बारिश में तैयार हुई हरी घास को काट कर मवेशियों को खिलाते हैं, लेकिन यमुना की बाढ़ से फसलों के साथ घास की हरियाली भी खत्म हो गई। जिससे मवेशियों के लिए हरे चारे का संकट खड़ा हो गया है।
इन गांवों में बाढ़ से प्रभावित हुई फसलें
ललौली क्षेत्र के कोर्रा कनक, डढ़ियार, हड़ाही, मैनाही, भूप का डेरा, बेलवारा, धोबिया, ओती, ललौली, महना, उरौली, दसौली, पलटूपुर, अढ़ावल, धनुवन। अमौली क्षेत्र में परसेढ़ा, दपसौरा, रुस्तमपुर, गौरी औंरा, मवई, रिठवां, अवाजीपुर, धाना, चांदपुर, औंरा निस्की, सिकंदरपुर, फरसा, पटेउता, मकरंदपुर, किशनपुर के नरौली, मड़ौली, सेंधरी, महावतपुर असहट, मटियार डेरा गांवों में फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
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