धाता। बारिश से तालाब ओवरफ्लो होने से पानी धाता उपकेंद्र में घुस गया। मशीनों और ट्रांसफार्मर के चारों तरफ पानी भर जाने से फाल्ट की आशंका बढ़ गई, जिस कारण आपूर्ति बंद कर दी गई। बाद में खड़ंजा काटकर पानी निकाला गया और साढ़े 22 घंटे बाद बिजली चालू की गई। करीब 70 हजार की आबादी को बुधवार सुबह 10 बजे से गुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे के बीच बिन बिजली के रहना पड़ा।
मंगलवार रात के बाद बुधवार सुबह से क्षेत्र में जमकर पानी बरसा। इससे धाता उपकेंद्र के पास बना तालाब ओवर फ्लो हो गया। पानी उपकेंद्र के अंदर घुस गया। ऐसे में यहां रखे 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर के चारों ओर पानी भर गया। पानी फीडरों तक पहुंच गया। छत से पानी टपकने के कारण मशीनों में फाल्ट की आशंका बढ़ गई। कुछ जगहों पर फाल्ट भी हुआ। भूमिगत केबलों के जलने व मशीनों के खराब होने की आशंका व हादसे से बचने के लिए उपकेंद्र से आपूर्ति ठप कर दी गई।
बुधवार की सुबह 10 बंद हुई बिजली पूरी रात नहीं आई। गुरुवार सुबह पानी निकालने के लिए उपकेंद्र के नजदीक से निकली नहर की ओर पानी को मोड़ने के लिए खड़ंजा को तीन जगह से काटा गया। इससे कुछ ही घंटे बाद परिसर से पानी निकल सका।
इसके बाद कर्मचारियों ने मरम्मत की और सुबह साढ़े आठ बजे आपूर्ति चालू कर दी। जेई धाता चंद्रमा प्रसाद ने बताया कि उपकेंद्र में तालाब का पानी घुस गया था। फाल्ट की आशंका से बुधवार सुबह करीब 10 बजे आपूर्ति बंद की गई थी। आपूर्ति शुरू रहने से उपकरणों के फुंकने और कर्मचारियों को करंट लगने का खतरा था। सुबह साढ़े आठ बजे आपूर्ति चालू कर दी गई है।
धाता कस्बा और 60 गांवों की गुल रही बिजली
आपूर्ति ठप होने से धाता कस्बा के साथ ही 60 गांवों की बिजली गुल हो गई। धाता कस्बे के चार फीडरों से करीब 70 हजार लोगों को बिजली दी जाती है। लेकिन बुधवार सुबह अचानक उपकेंद्र में पानी भरने से चारों फीडर की आपूर्ति ठप कर दी गई। लोगों के सामने पानी का भी संकट खड़ा हो गया।
नाला निर्माण की उठाई मांग
धाता के रहने वाले संदीप सिंह, विवेक सिंह, रिजवान, कलीम, भानूप्रताप केसरवानी, अर्जुन सिंह, रोशनलाल और गुलाब सिंह आदि ने नाला निर्माण की मांग की है। जिससे हर साल होने वाली यह समस्या खत्म हो सके।