फतेहपुर। धान खरीद तो लक्ष्य के करीब पहुंच गई है, लेकिन किसान भुगतान के लिए भटक रहे हैं। एजेंसियों पर किसानों का करीब 47 करोड़ 33 लाख रुपये का भुगतान बकाया है।
अब ज्यादातर क्रय केंद्रों में खरीद बंद हो चुकी है, जिन किसानों के धान की तौल नहीं हुई है। वह अपने धान को गल्ला आढ़तियों और राइस मिलों को भेज रहे हैं।
इस समय सिर्फ विपणन शाखा, भारतीय खाद्य निगम के क्रय केंद्रों में धान की तौल हो रही है। उसमें भी खरीद की क्षमता 300 से घटा कर 200 क्विंटल रोज के हिसाब से कर दी गई है।
वर्ष 2022 में शासन से जिले को एक लाख 37 हजार 500 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य मिला था। लक्ष्य को हासिल करने के लिए छह संस्थाओं के 81 क्रय केंद्र बनाए गए थे।
28 फरवरी तक खरीद होनी है, लेकिन यूपीएसएस, नैफेड और पीसीएफ संस्था के क्रय केंद्रों पर पहले ही धान खरीद बंद कर दी गई है, फिर भी इन संस्थाओं ने अपने लक्ष्य के करीब धान खरीद पूरी कर ली है।
एक नवंबर से शुरू हुई धान खरीद में 25790 किसानों का एक लाख 35 हजार मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है। इनमें 3600 किसान ऐसे हैं, जिन्हें भुगतान अभी तक नहीं हो सका है।
जबकि नैफेड, यूपीएसएस और पीसीएफ संस्थाओं के क्रय केंद्र बंद हुए 10 दिन से अधिक का समय बीत गया है। क्रय केंद्र बंद होने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
क्रय केंद्रों में अब केंद्र प्रभारी भी नहीं मिलते है। ऐसे में बेचे गए धान के भुगतान की बात किसान नहीं कर पा रहे हैं। वह बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। जबकि शासन से 72 घंटे में किसानों के खाता में रुपये भेजने का दावा किया जाता है।
किस संस्था का कितना बकाया
संस्था का नाम - बकाया धनराशि लाख रुपये में
हाटशाखा - 1099.66
पीसीएफ - 1612.35
नैफेड - 1536.71
यूपीएसएस - 134.09
मंडी समिति - 348.85
भारतीय खाद्य निगम - 2.05
राम सिंह ने बताया कि 12 जनवरी को धान बेचा था, अभी तक रुपया नहीं आया है। 16 और 18 फरवरी को रिश्तेदारी में शादी भी हैं, जिसके लिए खरीदारी करनी है। क्रय केंद्र बंद हो जाने के कारण अब केंद्र प्रभारी भी नहीं मिलता है।
मलखान सिंह ने बताया कि बहरामपुर नैफेड क्रय केंद्र में 11 जनवरी को धान बेचा था। इनका अभी तक भुगतान नहीं मिला है। एक लाख आठ हजार रुपये का बेचा था। अब खाते में रुपया आने का इंतजार कर रहे हैं।
कोर्रा के रवि यादव ने बताया कि 15 दिसंबर को धान की तौल कराई थी, बाबा के नाम पंजीकरण हुआ था। उसमें वह नॉमिनी हैं। धान तो बिक गया है, लेकिन रुपया अभी तक नहीं मिला है। अधिकारियों से भी बात की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
धान का भुगतान समय पर न कराए जाने के कारण संस्थाओं के क्रय केंद्रों पर तौल रोक दी गई है। सभी संस्थाओं के जिला प्रभारियों को नोटिस देकर शत प्रतिशत भुगतान कराने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही किसानों के खाता में रुपया पहुंच जाएगा। - अविनाश झा, जिला खाद्य विपणन अधिकारी