फतेहपुर। आईटीआई में चपरासी के पद पर नौकरी लगवाने का झांसा देकर एक युवक से तीन लाख रुपये जालसाजों ने ठग लिए। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के गढ़ीवा मोहल्ला निवासी अजय कुमार गौतम का आरोप है कि 30 दिसंबर 2016 को सेवायोजन कार्यालय में भर्ती की सूचना पर वह पहुंचा था। जहां आफिस के बाहर शिववचन यादव, सुरेंद्र कुमार यादव, वीरेंद्र कुमार यादव, धर्मेंद्र कुमार यादव, रामबचन यादव और अनिल सिंह से उसकी मुलाकात हुई।
यह लोग वाराणसी सारनाथ चौबेपुर थाने के चौक रुस्तमपुर यादव बस्ती निवासी हैं। शिवबचन ने शिक्षक संघ का प्रभारी और खुद की विभाग पर अच्छी पकड़ बताई। आईटीआई में चपरासी के पद पर तीन लाख रुपये में नौकरी लगवाने का झांसा दिया।
उसने विश्वास में आकर शिवबचन के खाते में 29 नवंबर 2017 को एक लाख रुपये ट्रांसफर किए। गढ़ीवा मोहल्ले के अमित और राजशेखर के सामने पांच जनवरी 2018 को दो लाख रुपये दिए।
11 अप्रैल 2018 को आरोपियों ने नौकरी लगने की बात कही। 13 अप्रैल को लखनऊ में लायटीन मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय में साक्षात्कार कराया। उसके बाद दूसरे दिन नियुक्ति पत्र थमा दिया।
नियुक्ति पत्र लेकर वह आईटीआई कार्यालय पहुंचा। जहां नियुक्ति पत्र फर्जी होना बताया गया। उसने शिवबचन से शिकायत की। तो उसने तीन-चार माह में दूसरी जगह नौकरी दिलाने की बात कही।
नौकरी नहीं लगने पर रुपये वापस मांगे। उन लोगों ने चार जून 2020 को गाली देकर रुपये देने से मना कर दिया। मामले की पुलिस से शिकायत की गई। कार्रवाई न होने पर कोर्ट में शिकायत की। कोतवाल अरुण चतुर्वेदी ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
वाराणसी, लखनऊ और कोतवाली में आरोपियों पर दर्ज हैं मुकदमे
फतेहपुर। नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले वाराणसी के जालसाज गिरोह पर सदर कोतवाली पुलिस ने तीन साल पहले भी मुकदमा दर्ज किया था। आरोपियों पर कई मुकदमे वाराणसी में भी दर्ज हैं।
लखनऊ में भी फिल्म निर्माता से जालसाजी और अपहरण के मामले में आरोपियों पर मामला दर्ज हो चुका है। इस जालसाजी का मास्टर माइंड शिव बचन यादव को बताया जा रहा है। उसकी और उसके साथियों की फोटो भी पूर्व मुख्यमंत्री के साथ वायरल हुई हैं।
सदर कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास निवासी विनोद कुमार सिंह की शिक्षक संघ साथियों के जरिये शिवबचन यादव से 2013 में मुुलाकात हुई थी। विनोद को शिव बचन ने तत्कालीन सरकार के सीएम से नजदीकी संबंध होना बताया था।
विनोद को उसके बेटे राजशेखर की हाईकोर्ट में समीक्षा अधिकारी के पद पर नौकरी दिलाने का शिव बचन ने झांसा दिया था। जिसके लिए 10 दिसंबर 2015 को 20 लाख रुपये शिव बचन ने लिए थे।
नौकरी नहीं लगने पर 2017 में रुपये विनोद ने वापस मांगे। रुपये नहीं लौटाने पर विनोद कुमार सिंह ने शिवबचन यादव, सुुरेंद्र यादव, वीरेंद्र यादव, धर्मेंद्र यादव, रामबचन यादव, चंद्रेश यादव, अनिल सिंह, विवेक प्रताप सिंह, मृत्युंजय सिंह के खिलाफ 24 जुलाई 2019 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
वाराणसी में धोखाधड़ी के शिवबचन यादव पर छह मुकदमे, रामबचन पर दो मुकदमे, सुरेंद्र यादव पर पांच और वीरेंद्र यादव पर पांच मुकदमे दर्ज हैं। यह मुकदमे मडुवाडीह, शिवपुर और लंका थाने में दर्ज हैं। रामबचन पर बलवा, सार्वजनिक संपत्ति निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा है। बाकी आरोपियों पर धोखाधड़ी के 2019 में मुकदमे हुए हैं।