हंस रानी को प्रमाण पत्र देते कृषि वैज्ञानिक। संवाद
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खागा। कृषि विज्ञान केंद्र थरियांव में मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण का सोमवार को समापन हो गया। आखिरी दिन प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
इसके साथ ही आत्मनिर्भर भारत की कल्पना को साकार करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि किस तरह से वह अब इस कारोबार से लाभ ले सकते हैं।
डा.साधना वैश्य ने कहा कि शहद उत्पादन का काम समूह बनाकर करें। डा.जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिले में नई राह और नई उमंग की सोच को ध्यान में रखते हुए कार्य करना है। डा.नौशाद आलम ने कहा कि शहद का उत्पादन बहुत जरूरी है।
आर्युवेद में शुरूआत से लेकर अंत तक शहद का प्रयोग बताया गया है। डा.जगदीश किशोर ने कहा कि शहद से इम्युनिटी बढ़ती हैं। कोरोना जैसी महामारी में भी इसका प्रयोग हुआ है।
डा.अल्का कटियार ने कहा कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन पांच से दस ग्राम शहद खाना चाहिए। समापन कार्यक्रम में भईया लाल, अमित कुमार, शिवानी श्रीवास्तव, हंसरानी आदि को प्रमाण पत्र वितरित किया गया।