फतेहपुर। तहसीलदार की न्यायालय से 19 साल पहले जो आदेश हुआ था, उसका अनुपालन बुधवार को हुआ। दरअसल, इतने पुराने आदेश का जब पालन अभी तक नहीं हुआ तो गांव के एक बाशिंदे ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। जिसमें जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी खागा और तहसीलदार खागा को पार्टी बनाया गया। हाईकोर्ट ने मामले में तीनों अधिकारियों को नोटिस देकर जवाब मांगा तो सरकारी महकमे की नींद टूटी। आनन-फानन में बुधवार को कार्रवाई कर दी गई।
मामला खागा तहसील के गांव अजई का है। यहां चकबंदी के दौरान हरिजन आबादी के लिए जमीन सुरक्षित की गई थी। इसके अलावा, पिछड़ी जाति व सामान्य आबादी को बसाने के लिए स्थान नियत किए गए थे। मगर हरिजन आबादी के रूप में सुरक्षित की गई जमीन पर अजयईपुर निवासी अर्जुन सिंह, प्रेम सिंह, ननकाई लोधी ने कब्जा कर पक्के मकान बनवा लिए। वर्ष 2002 में गांव के रामशरन रैदास ने तहसीलदार खागा को शिकायती पत्र देकर पूरा प्रकरण बताया था।
30 दिसंबर 2002 को तत्कालीन तहसीलदार खागा ने हरिजन आबादी के लिए सुरक्षित जमीन पर पिछड़ा वर्ग के लोगों के बने मकानों को गलत बताते हुए कब्जा बेदखली का आदेश दिया था। मगर इसका पालन नहीं हुआ। 16 सितंबर 2021 को रामशरन ने अधिवक्ता ओपी सिंह की मदद से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर दी। हाईकोर्ट ने जब डीएम, एसडीएम और तहसीलदार को नोटिस दी तो प्रशासन चेता। बुधवार को तहसीलदार शशिभूषण मिश्र, खागा कोतवाल संतोष शर्मा, कानूनगो तिलक दत्त व लेखपाल विकास कुमार, कुश वर्मा, हिमांशु, भवन सिंह, विजयपाल सिंह और पंकज के साथ मौके पर पहुंचे और तीनों मकान गिरा दिए।