फतेहपुर। 16 बैंकों की करीब 6833 करोड़ रुपये की डिफाल्टर श्री लक्ष्मी कॉटसिन ने 2005 से 2013 तक अलग-अलग बैंकों से कारोबार विस्तार के लिए 2650 करोड़ का लोन लिया था। पेनाल्टी और ब्याज मिलाकर अब लोन की राशि छह हजार करोड़ से अधिक हो गई है। उधर, जिले में लक्ष्मी समूह की चारों मिलों पर देर शाम तक सीबीआई जांच करती रही।
कंपनी में 2019 तक उत्पादन होता था। जुलाई 2019 में कंपनी लिक्विडेशन में चली गई। इसके बाद बैंकों की रकम लौटाने के लिए कंपनी की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 31 मार्च 2021 को तीसरी बार नीलामी का नोटिस निकाला गया था। इसमें नोएडा सेक्टर 57 स्थित कॉरपोरेट ऑफिस, अभयपुर यूनिट, मलवां स्थित डेनिम यूनिट, रेवाड़ी यूनिट, मलवां स्पिनिंग यूनिट को शामिल किया गया था। इन सभी कंपनियों की अनुमानित कीमत करीब 554 करोड़ लगाई गई थी। देश भर के 18 लोगों ने इसमें रुचि दिखाई थी।
वहीं, सीबीआई ने जिले की सभी चार मिलों में शनिवार शाम तक जांच की। सीबीआई टीम सुबह सुबह 10 बजे सौंरा पहुंची। छिवली में शाम को चार बजे, रेवाड़ी और रहसूपुर औद्योगिक इकाइयों में दोपहर को छापा मारा गया। टीमों ने सिक्योरिटी गार्डों से पूछताछ की। मिलों में बंद पड़े कार्यालयों के ताले खुलवाए। कार्यालय में मौजूद कंप्यूटर की हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, कर्मचारियों का लेखाजोखा, रजिस्टर, कंपनी के एक्सपोर्ट इंपोर्ट कारोबार संबंधी कागजात जुटाए हैं। छिवली स्थित मिल में टीम शाम तक हटी थी।
वेलस्पन, ट्राईडेंट और सुमाया ने नहीं दिखाई थी दिलचस्पी
श्री लक्ष्मी कॉटसिन मिल को टेकओवर करने के लिए कपड़ा क्षेत्र की नामी कंपनियों ने शुरुआत में रुचि दिखाई थी, लेकिन कंपनी के कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते बात आगे नहीं बढ़ सकी थी। वेलस्पन ने सबसे पहले इसमें रुचि दिखाई थी। इस पर एनसीएलटी ने अक्तूबर 2020 तक का समय दिया था। इसके बाद भी कंपनी ने प्रस्ताव नहीं दिया था।
सूत्रों ने बताया कि वेलस्पन कंपनी के प्रतिनिधियों ने अभयपुर स्थित टॉवेल प्लांट और मलवां स्थित डेनिम प्लांट का निरीक्षण भी किया था। कंप्यूटारइज्ड प्लांट में बड़े पैमाने पर उपकरणों के चोरी होने का पता चला था। इस वजह से वेलस्पन ने हाथ खींच लिए। इसके बाद लुधियाना की ट्राईडेंट और मुंबई की सुमाया अपेरल कंपनी ने भी इसे दिलचस्पी दिखाई। थी। इसके लिए एनसीएलटी ने चार जनवरी 2021 तक प्रस्ताव देने को कहा था लेकिन प्रस्ताव नहीं मिला। अब कंपनी पर सीबीआई ने छापेमारी की है।
एनसीएलटी ने प्रशासक किया था नियुक्त
फतेहपुर। लक्ष्मी ग्रुुप की सौंरा, मलवां, रहसूपुर रेवाड़ी और अभयपुर में मिले हैं। इन मिलों के लिए 16 बैंकों से लक्ष्मी ग्रुप ने लोन लिया है। ग्रुप की सबसे बड़ी इकाई सौंरा में लगी थी, जो करीब पांच साल से बंद चल रही है। इसके बाद धीरे-धीरे दूसरी मिलों में भी ताले लग गए। मामला एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में पहुंचा था। इसके बाद प्रशासक के रूप में रोहित सहगल नियुक्त किए गए थे।
उनकी नियुक्ति के बाद कॉटन मिल संचालन की उम्मीद जगी थी। काटन उद्योग से जुड़ी कई बड़ी कंपनियां भी आई थीं, लेकिन हालातों को देखकर कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं संभाली। खरीद के लिए सामने आईं कंपनियों ने एनसीएलटी को सभी इकाईयों से कीमती मशीनें गायब होने की जानकारी दी। जिसके बाद सीबीआई जांच का आदेश हुआ।
बंद मिलों में कई बार लगी आग से बढ़ा संदेह
पिछले दो सालों में लक्ष्मी ग्रुप की बंद पड़ी मिलों में आग लगने कई घटना हुईं। यहां सिक्योरिटी गार्ड मौजूद रहते थे। इसके बाद भी आग लगने का कारण संदिग्ध रहा। मिल प्रशासन की ओर से पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने का भी प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस ने मिल बंद होने के कारण रिपोर्ट दर्ज करना उचित नहीं समझा।
मलवां थाना अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र सौंरा की लक्ष्मी कॉटन मिल में करीब आठ माह पहले और करीब दो साल पहले आग लगने की दो घटनाएं हुई थीं। इसी तरह छिवली में भी आग लगने की घटना हुई। आग लगने में मिल की संपत्ति को नुकसान भी होना स्वाभाविक माना जा सकता है। मिल प्रशासन की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई थी। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। यही कारण रहे कि आग लगने के कारण आज तक दबे ही रहे। (संवाद)
इन बैंकों का है लोन
लक्ष्मी ग्रुप को सेंट्रल बैंक, यूनियन बैंक, स्टेट बैंक, इंडियन बैंक, केनरा बैंक, बीओबी, पंजाब नेशनल, एसबीआई और एचडीएफएसी बैंक की 16 शाखाओं ने लोन दिया था। बैंकों ने मिलें बंद होने और रकम डूब जाने की एनसीएलटी को रिपोर्ट दी थी। मिलों की की पांच अगस्त को नीलामी लगी थी लेकिन तकनीकी कारणों से नीलामी नहीं हुई। लक्ष्मी काटसन मिल की जिले में अरबों की संपत्ति है।
सौंरा, मलवां, रहसूपुर रेवाड़ी और अभयपुर में हाईवे के किनारे करोड़ों की कीमत के प्लांट लगे थे। मिलें लगाने के लिए ढाई से 300 बीघे जमीन भी मालिकानों ने खरीदी थी। संपत्ति की कीमत अरबों रुपये है। फैक्ट्री बंद होने से कई प्रदेशों और जिले के करीब 2900 से अधिक कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। कर्मचारियों का ढाई साल का वेतन व लाखों रुपये एरियर का बकाया है।
लक्ष्मी काट्सन का परिचय ...
लक्ष्मी काट्सन का गठन 31 अगस्त 1988 को हुआ था। इसका मुख्यालय कानपुर में है। कंपनी के मालिक एमपी अग्रवाल हैं और वही इसका संचालन कर रहे थे। कंपनी की हैसियत 2900 करोड़ की रही है। लक्ष्मी काटसन होम फर्नीशिंग, डेनिम फैब्रिक, तौलिया, लेनिन के कपड़े, टेक्रिल टेक्सटाइल और कॉटन बनाती है। कंपनी के उत्पादों की देशभर और विदेशी बाजारों तक में पहुंच है। मिल में सैन्य सप्लाई की बुलेट प्रूफ जैकेट और वर्दी के कपड़े भी बनाए जाते थे।