बहुआ। बाढ़ का पानी घटने से ग्रामीणों को कुछ राहत मिली तो अब कटान ने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। यमुना के तटवर्ती क्षेत्रों में कटान तेज हो गया है। अब तक 10 किसानों की करीब 30 बीघे खेत यमुना में समा गए हैं। बहाव तेज होने से कटान अभी भी जारी है। इससे तटवर्ती गांव के लोगों में दहशत बनी हुई है।
यमुना नदी के बाढ़ का पानी खतरे का निशान पार करके चार दिन से तटवर्ती गांवों में दहशत मचाए था। अब पानी खतरे के निशान से नीचे चला गया है। किसानों को फसलों के अलावा कटान की तबाही दिखाई देने लगी है। क्षेत्र के हड़ाही, मैनाही गांव कटान से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। हड़ाही के किसान योगेंद्र का पांच बीघे, मेड़िया के
जयवीर सिंह और मुन्ना सिंह का दो-दो बीघे खेत कटान के कारण बह गया है। इसी प्रकार मैनाही के रामकृपाल यादव का दो बीघे, भम्भुल का एक बीघा और नत्थू की आधा बीघा जमीन कटान में चली गई है। एसडीएम प्रमोद झा ने बताया कि राजस्व टीम भेजकर खतौनी के मुताबिक नुकसान का आकलन किया जाएगा और किसानों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद मुआवजे का निर्धारण किया जाएगा।
एक दशक से ललौली क्षेत्र की करीब 14 हजार बीघे जमीन कटान से यमुना में समाहित हो गई है। इसमें नत्थू सविता की 60 बीघा, मेड़िया देवी की 45 बीघा, अनंत पाल सिंह की 50 बीघा, रामबरन सिंह के 60 बीघा, पेशकार सिंह की 50 बीघा, अजयपाल सिंह की 40 बीघा, दलजीत सिंह की 45 बीघा, राममूरत सिंह के 35 बीघा के अलावा करीब 2500 किसानों की 14 हजार बीघे जमीन कटान में चली गई है।