रोते बिलखते नरेंद्र के परिजन। संवाद
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फर्रुखाबाद। पत्नी के मायके से न आने पर कंपाउंडर ने कमरा बंद करके गले में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सुबह काफी देर होने के बाद भी वह घर से नहीं निकला तो भाई ने झरोखे से देखा। तब घटना का पता चला। प्रधान की सूचना पर पहुंची पुलिस के सामने गेट का लॉक तोड़कर शव को फंदे से उतारा गया।
गांव बुढ़नामऊ निवासी नरेंद्र जाटव (34) आवास विकास के एक नर्सिंग होम में कंपाउंडर था। कायमगंज के गांव कुबेरपुर निवासी रजनी के साथ उसका विवाह हुआ था। उसके दो बेटे यश व नन्हें हैं। दो महीने से दंपती में विवाद चल रहा था। पत्नी रजनी एक माह पहले अपने मायके चली गई। दोनों बच्चों को भी साथ लेकर गई थी।
परिजनों के अनुसार मंगलवार रात नरेंद्र की पत्नी से बात हुई थी। उसने आने से इनकार कर दिया था। इस पर नरेंद्र ने कमरे में अंदर से कुंडी बंद करके चादर से फंदा बनाकर कुंडे से फांसी लगा ली। बुधवार सुबह पास के मकान में रह रहे भाई चंदन ने नरेंद्र के घर से निकलने पर उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई आवाज नहीं आई।
इस पर चंदन ने सीढ़ी लगाकर झरोखे से झांका तो नरेंद्र फंदे पर लटका था। उसकी सूचना पर प्रधान मनोज मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजे का लॉक तुुड़वाया। शव को उतार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। नरेंद्र की मौत पर पत्नी रजनी, भाई चंदन, बहन विमला का रो रो कर बुरा हाल हो गया।
नरेंद्र के फांसी लगाने के बाद जांच करती पुलिस व लगी भीड़। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD