फर्रुखाबाद। 31 वर्ष पहले रोड होल्डअप कर अपर जिला जज से लूटपाट और अधिवक्ता के अपहरण के मामले में विशेष अदालत एंटी डकैती ने एक आरोपी को दोषी करार देकर सात साल की सजा सुनाई है। उस पर 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान किया है। अपहृत होने वाले अधिवक्ता बाल रोग विशेषज्ञ विवेचक चौरसिया के भाई हैं।
फतेहगढ़ जिला न्यायालय में वर्ष 1990 में विजय सिंह अपर जिला जज के पद पर तैनात थे। 18 मार्च 1990 को वह कार से इटावा से लौट रहे थे। उनके साथ फतेहगढ़ क्षेत्र के स्टेट बैंक गली निवासी अधिवक्ता राकेश कुमार चौरसिया और दालमंडी निवासी शैलेंद्र कुमार गुप्ता भी थे। कार शैलेंद्र चला रहे थे।
मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव खिमसेपुर के पास रात करीब पौने नौ बजे सड़क पर चारे के गठ्ठर पड़े होने पर शैलेंद्र ने कार रोक दी। कार रुकते ही असलहा धारी बदमाशों ने घेर लिया। बदमाशों ने जज विजय सिंह से 2500 रुपये, घड़ी, शैलेंद्र से घड़ी व सौ रुपये और राकेश से दो अंगूूठी लूट ली। बदमाश नाम पता पूछकर राकेश को पकड़ ले गए थे। बदमाशों ने एक लाख रुपये फिरौती मांगी थी।
शैलेंद्र की तहरीर पर मोहम्मदाबाद कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर कान्हेपुर गांव के प्रभाष चंद्र दुबे व एक को पकड़ा था। उनकी निशानदेही पर राकेश को 20 मार्च 1990 को मुक्त कराया गया। विवेचक ने प्रभाष व दूसरे आरोपी के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। नाबालिग होने से दूसरा आरोपी की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई।
विशेष अदालत एंटी डकैती के न्यायाधीश ने सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरनाथ सिंह, कृष्ण कुमार पांडेय ने दलीलों व साक्ष्यों के आधार पर आरोपी प्रभाष चंद्र दुबे को दोषी करार देकर सात साल की सजा सुनाई। दोषी पर जुर्माना भी लगाया गया। दोषी को जेल भेजा दिया गया है।