फर्रुखाबाद। जिले में हुई रिकार्ड तोड़ बारिश ने आलू किसानों को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है। बारिश से कच्ची आलू की फसल तो 70 प्रतिशत बर्बाद हो ही गई है, पक्की आलू की बुवाई भी पिछड़ जाएगी। बुवाई में देरी होने पर आलू की उपज घटने और रोग लगने की आशंका है। बारिश से सरसों, धान, गन्ना आदि को भी नुकसान हुआ है।
आलू जिले की मुख्य फसल है। इस बार करीब 44 हजार हेक्टेयर में आलू बुवाई का लक्ष्य है। इसमें 10 हजार हेक्टेयर में कच्ची (अगैती) आलू की बुवाई हो चुकी थी। ज्यादातर किसानों ने चार से छह दिन में आलू की बुवाई की थी। बारिश होने से 80 प्रतिशत अगैती आलू बर्बाद हो गया है। खेतों में कहीं एक फीट तो कहीं छह इंच तक पानी भरा है। आलू की कुंडियां पूरी तरह पानी में डूबी हैं। इससे आलू बीच सड़ जाएगा।
जिला आलू विकास एवं शाकभाजी अधिकारी आरएन वर्मा ने बताया कि चार-पांच दिन पहले बोई गई आलू की फसल पूरी तरह खराब हो जाएगी। अब कच्ची आलू की उपज होने की उम्मीद बहुत कम रह गई है। जिस तरह से खेत बारिश के पानी से भरे हैं, इससे पक्की आलू भी कम से कम 10 दिन पिछड़ (लेट) जाएगी। पक्की आलू की बुवाई 25 अक्तूबर तक करने पर ही अच्छी उपज मिलती है। उसके बाद रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है। इस बार अगैती आलू महंगा बिकेगा। शीतगृहों में भंडारित आलू के भाव भी 200 से 400 रुपये क्विंटल बढ़ने की संभावना है।
आलू के खेतों से पानी निकाल दें किसान
कृषि विज्ञान केंद्र लकूला के कृषि वैज्ञानिक डॉ.सुशील कुमार ने बताया कि जिन खेतों में चार-पांच दिन पहले आलू बोया गया है उनसे किसान पानी निकाल दें। पानी निकालने से बीच अंकुरित हो जाएगा। बीच का कम जमाव होने पर बीच-बीच में दोबारा बीच गाड़ दें। इससे नुकसान को कम किया जा सकता है। जिस खेत में आलू अंकुरित हो गया है, उन खेतों का पानी निकालने से फसल बच जाएगी। उपज भी अधिक प्रभावित नहीं होगी। जिस खेत में बुवाई कर चुके हैं, अगर उसमें दोबारा बुवाई करें तो खाद कम डालें। इसी तरह
जिन खेतों में सरसों के बीज का जमाव हो चुका है, उनका पानी भी निकाल दें। 10 से 15 सेमी दूरी पर यदि पौधा है तो दोबारा बुवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कटी फसलों को दीवारों के सहारे खड़ा करें
जिला कृषि अधिकारी डॉ.राकेश कुमार सिंह ने बताया कि इन दिनों उर्द, मूंग, धान की फसलें खेतों में कटी पड़ी हैं। बारिश से जो कटी फसलें डूबी हैं उनके गट्ठर दीवार के सहारे खड़ा कर दें। हवा लगने से पानी सूख जाएगा। इससे अनाज को नुकसान होने से बचाया जा सकता है। गन्ने के खेत से भी पानी निकाल दें। इससे गन्ने को पलटने से बचाया जा सकता है।
फसल खराब हुई तो प्रधान, सचिव को बताएं
फर्रुखाबाद। जिला कृषि अधिकारी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि फसलों को नुकसान का सर्वे के निर्देश दे दिए गए हैं। फसल बीमा कंपनी यूनिवर्सल सोंपो के कर्मचारियों के अलावा कृषि विभाग के एडीओ फसलों का सर्वे करेंगे। बताया कि बारिश में फसल के नुकसान का आंकलन ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाएगा। किसान फसल नुकसान की सूचना प्रधान, सचिव व एडीओ को दे सकते हैं। क्रेडिट कार्ड धारक सभी किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाया जाएगा। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि 31 दिसंबर तक केसीसी से फसल बीमा की किस्त जमा करनी होती है। इसमें अभी दो माह बचे हैं। इससे सभी केसीसी धारकों को लाभ मिलेगा।(संवाद)
कर्ज लेकर की थी आलू की बुवाई
कमालगंज क्षेत्र के ककरैया गांव के प्रदीप ने पांच बीघा खेत में आलू की बुवाई की थी। इसके लिए बाजार से कर्ज लिया था। वह आलू बेचकर बेटी की शादी कर करने का सपना संजोए थे। बारिश में एक सप्ताह पहले बोया गए आलू के खेत में पानी भर गया है। कूडी पूरी तरह डूबीं हैं। प्रदीप ने बताया कि पिछले साल तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल बीज होने से आलू की बुवाई नहीं की थी। इस बार बीज, खाद के लिए कर्ज लिया था।
दिव्यांग पिता का सहारा तीन बीघा खेती, बेटी ब्याहने का भी था सपना
श्रृंगीरामपुर के भिम्मी नगला निवासी सोबरन के पिता मंशाराम दिव्यांग हैं। पिता के पास तीन बीघा खेत हैं। सोबरन पिता को साल में छह हजार रुपये देकर खेती करते हैं। आठ दिन पहले कर्ज लेकर आलू की बुवाई की थी। बारिश होने से आलू की कुड़ी बह गईं। सोबरन ने बताया कि इस बार आलू बेटी का ब्याह करने के लिए लगाया था।
200 एकड़ में बोई तंबाकू की पौध नष्ट
कायमगंज क्षेत्र में दो दिन की बारिश ने तंबाकू के खेतों में लगाई गई पौध को नष्ट कर दिया है। आलू, सरसों का बीज बह गया है। बाजरा व धान की फसलों को भी नुकसान हुआ है।
कायमगंज क्षेत्र में करीब 400 एकड़ में तंबाकू की खेती की जाती है। इस समय तंबाकू की पौध लगाई जा रही है। लगभग 200 एकड़ में तंबाकू की रोपाई जा चुकी है। ये रोपाई पिछले चार पांच दिनों में की गई है। खेतों में बारिश का पानी भरने से तीन चार दिन में लगाई गई तंबाकू की ज्यादातर पौध नष्ट हो जाएगी। किसानों को दोबारा पौध लगानी पड़ेगी।
धान के खेतों में पानी भरने से कटी फसल डूब पानी में डूब गई है। इससे धान काला पड़ने और अंकुरित होने की आशंका है। हाल में बोया गया आलू भी सड़ने की आशंका है। सरसों की भी अब दोबारा बुवाई करनी होगी।
गांव जौरा निवासी आदेश दीक्षित ने बताया कि आठ बीघे में तीन दिन पहले तंबाकू की रोपाई कराई थी। खेत में बारिश का पानी भरने से पौध नष्ट हो जाएगी। दोबारा रोपाई करानी पड़ेगी। आठ बीघा आलू के खेत में भी पानी भर गया है। राहुल कुमार ने बताया कि दो दिन पहले पांच बीघा में तंबाकू की पौध लगाई थी। पानी भरने से पौध मारी जाएगी। दोबारा पौध लगाने पर फसल लेट हो जाएगी, इससे उपज घटेगी।
सदर तहसील में टूटा बारिश का रिकार्ड
अक्तूबर में बारिश का दशकों का रिकार्ड सोमवार को हुई बारिश ने तोड़ दिया। जिला मुख्यालय के रिकार्ड के अनुसार जिले में 89.67 मिमी बारिश हुई है। इसमें तहसील सदर में सर्वाधिक 142.2 मिली, अमृतपुर क्षेत्र में 107.4 मिमी और कायमगंज तहसील में सबसे कम 19.4 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। तहसील सदर क्षेत्र में 10 वर्षों के रिकार्ड के अनुसार अक्तूबर में इतनी बारिश कभी नहीं हुई। वर्ष 2012 के अक्तूबर में 2.2 मिली, 2013 में 27.2 मिमी, 2014 में 3.2 मिमी, 2015 में 4.4 मिमी, 2016 में 2.8 मिमी, 2019 में 20.4 बारिश रिकार्ड की गई है। गत वर्ष 2020 में अक्तूबर में एक दिन भी बारिश नहीं हुई। वर्ष 2017 व 18 में भी इस महीने बारिश नहीं हुई। लोगों को कहना कि पिछले कई दशक से अक्तूबर में इतनी बारिश नहीं देखी गई।
गांव परमनगर में आलू के खेत में भरे पानी को देखता किसान। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD
गांव जौरा में बारिश के पानी से जलमग्न हुई फसल को देखता किसान। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD
गांव करनपुर दत्त में बारिश का पानी खेत में भरने से डूबी कटी पड़ी धान की फसल निकालता किसान। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD