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50 साल पुरानी फर्रुखाबादी नमकीन को मिलेगी पहचान

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फर्रुखाबाद। रेलवे की ओर से स्टेशन पर फर्रुखाबादी नमकीन का काउंटर खोले जाने के फैसले का कारोबारियों ने स्वागत किया है। उनके मुताबिक इस फैसले से फर्रुखाबादी नमकीन (दालमोठ) का रुतबा और बढ़ेगा।
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देश-प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इसकी पहुंच होगी। अभी तक रेल यात्रियों को कन्नौज का गट्टा और घटपुरी की गुझिया ही रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध हो रही थी। जल्द ही 50 साल पुरानी फर्रुखाबादी नमकीन भी स्टेशनों पर मिलने लगेगी।
फर्रुखाबादी नमकीन का नाम आते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। 1950-60 के दशक में यहां बेसन के सेव बनाए जाते थे। धीरे-धीरे कारीगरी बढ़ी और कारोबार से जुड़े लोगों ने नमकीन में नए-नए उत्पाद बनाने शुरू किए।
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शहर में करीब 20 बड़े कारखाने संचालित हैं। इनमें रोजाना 100 क्विंटल से अधिक नमकीन का निर्माण होता है। गुणवत्ता से समझौता न करने की वजह से ही प्रदेश के करीब 30 जिलों के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड आदि प्रदेशों से ऑर्डर मिल रहे हैं।
नाला मछरट्टा के नमकीन निर्माता सूर्यप्रकाश बताते हैं कि फर्रुखाबाद की नमकीन का अपना अलग स्वाद है। इसकी पहचान के लिए कभी कोई पहल नहीं हुई। अब स्टेशन पर काउंटर खुलेगा, तो लंबी दूरी की ट्रेनों के यात्रियों के माध्यम से इसकी पहचान दूर-दूर तक जाएगी।
15 तरह की बनती हैं नमकीन
यहां के कारीगर सादा, गड़बड़, मूंगफली दाना, मूंग दाल, आलू भुजिया, सेम बीज, भुना काजू, मिक्स नमकीन, बेसन के लच्छे, चना दाल, आलू लच्छा समेत करीब 15 तरह की नमकीन बनाते हैं। महीन सेव व मूंग की दाल मिली हुई नमकीन को यहां दालमोठ कहते हैं। यह फर्रुखाबाद के अलावा दूसरी जगह नहीं बनती है।
200 से 1400 रुपये किलो तक हैं दाम
सबसे सस्ती दालमोठ 200 रुपये किलो में बिकती है। इसके बाद मूंग दाल, मूंगफली दाना के दाम 400 रुपये किलो तक हैं। सेम के बीज की नमकीन 1400 रुपये प्रति किलो तक में बिकती है। फर्रुखाबादी सेम बीज लोग खासा पसंद करते हैं।
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