फर्रुखाबाद। जिला जेल में उपद्रव के दौरान बंदियों ने तनहाई बैरक की दीवारें तोड़कर साथियों को निकाल लिया था। पथराव और आगजनी के दौरान करीब 50 बंदी गेट तोड़कर भागने की फिराक में थे। ये खुलासा एसआईटी की शुरुआती जांच में हुआ है।
जिला जेल में बवाल, बंदी शिवम की मौत के मामले की जांच के लिए डीजी जेल आनंद कुमार ने एसआईटी बनाई है। इसमें डीआईजी जेल वीपी त्रिपाठी, लखनऊ मुख्यालय के वरिष्ठ अधीक्षक अमरीश गौड़, सेंट्रल जेल फतेहगढ़ के वरिष्ठ अधीक्षक प्रमोद शुक्ला शामिल हैं। एसआईटी ने जांच में पता चला है कि उपद्रव के दिन बंदियों के हाथ में कुदालें थीं। उन्होंने तनहाई बैरक में नकब लगाकर साथी बंदियों को निकाल लिया था।
पथराव करते बंदियों ने चक्र कार्यालय में आग लगाकर वरिष्ठ अधीक्षक व जेलर के कक्ष के पास गेट को तोड़ने का प्रयास कर रहे थे। 50 से अधिक बंदी भागने का प्रयास भी कर रहे थे। पुलिस ने घेराव कर 68 बंदियों को छतों पर पकड़ा और एक-एक करके नीचे उतारा था। सैकड़ों बंदी पहले ही कूदकर बैरकों में चले गए थे। डीआईजी जेल ने बताया कि एसआईटी जांच अभी चल रही है। जल्द ही उसे पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
भइयादूज पर दो सौ रुपये लेकर मिलाई करवाने का आरोप
भइयादूज पर भी जिला जेल में 811 लोगों की मिलाई करवाई गई थी। यह आंकड़ा जेल प्रशासन ने जारी किया था। जांच करने पहुंची एसआईटी को बंदियों ने बताया कि भइयादूज के दिन मुलाकात करने आए परिजनों से दो सौ रुपये प्रति व्यक्ति के नाम पर वसूले गए। बिना रुपये दिए किसी की मुलाकात नहीं करवाई गई।