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डीपीओ कार्यालय से आंगनबाड़ी भर्ती में मांगे जा रहे एक लाख

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फर्रुखाबाद। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद के लिए एक लाख और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। रिश्वत के लिए फोन जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय से किए जा रहे हैं। कई आवेदनों ने फोन टेप कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए हैं। सीडीओ ने जांच के लिए कमेटी बनाने की बात कही है।
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जिले में 123 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, 206 मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 195 सहायिका के पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए हैं। शैक्षिक प्रमाणपत्रों और अन्य कागजों का सत्यापन चल रहा है। सत्यापन के बीच जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) कार्यालय के नंबर से फोन कर आवेदकों से रिश्वत मांगी जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद के लिए एक लाख और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद के लिए 50 हजार रुपये मांगे गए हैं।
आवेदक ने महिला कल्याण विभाग की एक अधिकारी, डीपीओ के चालक, शमसाबाद ब्लाक का संविदा कर्मचारी व एक मुख्य सेविका से बातचीत की रिकार्डिंग कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। आडियो सीडीओ के मोबाइल पर भी भेजे गए हैं। सीडीओ एम. अरून्मोली ने बताया कि एक लाख रुपये रिश्वत मांगने की बातचीत के आडियो मिले हैं। कमेटी बनाकर इसकी जांच कराई जाएगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी भारत प्रसाद ने रिश्वत के आडियो पर सवाल करते ही फोन काट दिया।
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शमसाबाद क्षेत्र के गांव सुल्तानगंज खरेटा निवासी वसुधा पत्नी विजय शर्मा आंगनबाड़ी में सहायिका हैं। वर्ष 2010 से उनके पास कार्यकर्ता का प्रभार है। उन्होंने कार्यकर्ता पद के लिए आवेदन भी किया है। विजय को डीपीओ कार्यालय की महिला अधिकारी ने फोन कर रिश्वत मांगी और कार्यालय बुलाया। विजय ने कहा कि गरीब
हैं और बेटी की शादी भी करनी है। महिला अधिकारी ने कहा कि काम कराना है या नहीं सीधे बताओ। विजय ने दूसरे दिन फोन कर कहा कि विकास भवन आ जाऊं, महिला ने जवाब दिया कि अब साहब से सीधे मिलो, वही काम करा पाएंगे। विजय ने जब जमा किए गए कागजों की रिसीविंग मांगी तो महिला अधिकारी ने कहा कि 50
लोगों के कागज जमा हैं, तुम्हारे कागज क्या अनोखे हैं। फिर विजय ने ब्लाक में संविदा पर तैनात महिला के भाई को फोन किया तो उसने भी एक लाख रुपये जमा करने की सलाह देते हुए कहा कि चयन तो लखनऊ से होगा। एक सूची भेजी जा चुकी है। रात-रात भर काम चल रहा है। फिर विजय ने मुख्य सेविका से बात की तो उसने
जवाब दिया सहायिका से 50 हजार रुपये ले लेना चाहिए। वैसे तो मिनी आंगनबाड़ी के लिए 50 हजार व आंगनबाड़ी के लिए एक लाख रुपये लिए जा रहे हैं। वह सिफारिश कर देंगी तो 10-5 हजार रुपये कम हो जाएंगे। विजय ने डीपीओ के चालक को फोन कर कहा तो उसने जवाब दिया मोहम्मदाबाद के चार फार्म और भी जमा कराए हैं। विजय ने बताया कि एक सहायिका से भी एक लाख रुपये की मांग की गई है।
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