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कोरोना: आंकड़ों में 194 की मौत, सहायता राशि 384 को दी

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फर्रुखाबाद। कोरोना महामारी में हुईं मौतों के सही आंकड़ों पर स्वास्थ्य विभाग ने पर्दा डालने का खूब प्रयास किया, लेकिन उसकी यह हरकत अब खुलकर सामने आ गई है। विभाग ने जिले में कुल 194 मौतें कोरोना से होने की बात कही है, जबकि सहायता राशि 384 लोगों को अभी तक दी जा चुकी है। 58 आवेदन खारिज हो चुके हैं और 12 लंबित हैं। इससे स्पष्ट है कि विभाग ने जो आंकड़े पेश किए उससे करीब दो गुनी मौतें जिले में कोरोना से हुईं।
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न्यायालय के आदेश पर जब शासन से कोरोना से जान गंवाने वालों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये अनुग्रह सहायता राशि देने का एलान किया तो आंकड़ों से पर्दा हटने लगा। सरकारी पोर्टल पर कोरोना की पहली व दूसरी लहर के दौरान जिले में 194 लोगों की मौत दर्ज थी।
दिसंबर 2021 से मृतकों के परिजनों को अनुग्रह सहायता राशि देने के लिए इतने ही मृतकों की सूची जिला मुख्यालय को भेजी गई। इसके साथ ही अन्य लोगों की कोरोना से मौत की पुष्टि के लिए जांच कमेटी गठित की गई।
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इसमें एडीएम, सीएमओ, एसीएमओ व एक फिजीशियन को शामिल किया गया। इसके बाद अनुग्रह सहायता राशि के लिए आवेदन आना शुरू हुए तो मृतकों की संख्या बढ़ती चली गई।
सरकारी पोर्टल पर दर्ज 194 मृतकों में से अब तक 170 के परिजनों को 50-50 हजार रुपये अनुग्रह सहायता राशि दी जा चुकी है। बताया जा रहा है कि शेष 24 मृतकों में से कुछ के परिजन गैर जनपद में रहते हैं इससे उन्हें उसी जनपद से अनुग्रह सहायता राशि मिलेगी, जबकि कुछ ने अनुग्रह सहायता राशि लेने से मना कर दिया। फिलहाल अब तक प्रशासन कुल 384 मृतकों के परिजनों को अनुग्रह सहायता राशि दे चुका है।
इसके अलावा 58 लोगों की कोरोना से मौत की पुष्टि न होने पर आवेदन निरस्त किए जा चुके हैं। हाल ही में आए 12 आवेदन अभी लंबित हैं। सरकारी पोर्टल पर 194 लोगों की मौत दर्ज होने और 384 मृतकों के परिजनों को अनुग्रह सहायता राशि दिए जाने से साफ है कि स्वास्थ्य विभाग कोरोना से मौत के आंकड़ों पर पर्दा डालता रहा।
एडीएम सुभाष चंद्र प्रजापति ने बताया कि अब तक 384 मृतकों के परिजनों को अनुग्रह सहायता राशि दी जा चुकी है। जो आवेदन लंबित हैं, उन्हें भी कमेटी की जांच रिपोर्ट लगने के बाद निस्तारित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ मौतें ऐसी भी हुई हैं, जिनकी जांच रिपोर्ट तो पॉजिटिव आई, लेकिन मौत घर में हो जाने से स्वास्थ्य विभाग को सूचना नहीं दी गई। कमेटी की जांच में इसकी पुष्टि होती है।
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