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ट्रस्ट तय करेगा दो लाख पूजित राम शिलाओं का भविष्य

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अयोध्या-राममंदिर कार्यशाला में सहेज कर रखी गयी रामशिला - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। रामघाट स्थित राममंदिर कार्यशाला में करीब तीन दशक से सहेजकर रखी गईं राम शिलाएं (ईंट) राममंदिर आंदोलन की व्यापकता की कहानी बयां करती हैं। अब यहां एकत्र की गईं करीब दो लाख शिलाओं को रामजन्मभूमि परिसर में पहुंचाने की तैयारी तेज हो गई है।
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इन शिलाओं का भविष्य क्या होगा, यह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तय करेगा। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट कह दिया है कि राम शिलाओं का सम्मानजनक उपयोग किया जाएगा।
रामशिलाएं राममंदिर आंदोलन की धरोहर हैं। मंदिर आंदोलन के इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो प्रारंभिक दौर में राममंदिर आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए विहिप के नेतृत्व में संतों के सहयोग से 1987 से 89 के बीच पूरे देश में रामशिला पूजन का अभियान शुरू हुआ था।
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राम मंदिर निर्माण के लिए हिंदू समाज से ईंट श्रीराम शिला के तौर पर मांगी गई। दिवंगत अशोक सिंघल की प्रेरणा से रामशिला पूजन का कार्यक्रम हुआ। बद्रीनाथ धाम में पहली रामशिला का पूजन हुआ।
इसके बाद पूरे देश में करीब छह करोड़ लोगों ने रामशिला पूजन किया। लगभग दो लाख 75 हजार गांव में शिला पूजन हुआ। देश ही नहीं विदेशों से भी रामभक्तों ने राम शिलाएं भेजीं।
शिलापूजन में मंदिर निर्माण के लिए पौने तीन लाख से अधिक रामशिला (ईंटें) एकत्रित हुईं। यह सभी शिलाएं अक्तूबर 1989 के अंत में सुरक्षित अयोध्या पहुंचा दी गईं। खुले में पड़े रहने के कारण ईंटें काली पड़ने लगीं।
इसके बाद इन्हें सहेजने का निर्णय लिया गया। इसके लिए रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला के एक छोर पर टिनशेड लगाकर ईंटों को मंदिर की आकृति में व्यवस्थित कर दिया गया।
अब इन शिलाओं के भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जाने लगी है। माना जा रहा है कि इन शिलाओं को प्रयोग राममंदिर निर्माण में किया जाएगा। हालांकि राममंदिर निर्माण में कहीं ईंट का प्रयोग नहीं होना है, ऐसे में ट्रस्ट इन शिलाओं को किस रूप में सहेजेगा यह अभी स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल शिलाओं को राम जन्मभूमि परिसर में पहुंचाने का यत्न प्रारंभ कर दिया गया है। शिलापूजन में एकत्र हुई पौने तीन लाख से अधिक शिलाओं में से दो लाख के करीब ईंटें अब भी मंदिर निर्माण की धरोहर के रूप में सहेजकर राममंदिर कार्यशाला रामघाट में रखी गई हैं।
कुछ ईंटें तो शिलापूजन मुहिम के तत्काल बाद 1989 में मंदिर निर्माण के लिए हुए शिलान्यास में प्रयोग की गईं। जबकि 1992 में विवादित स्थल के करीब समतलीकरण के बाद निर्मित चबूतरे में भी 50 हजार से अधिक पूजित शिलाएं प्रयुक्त हुईं।
शुरूआती दौरे में इन शिलाओं को फकीरे राम मंदिर में रखा गया था। करीब डेढ़ दशक पूर्व इन शिलाओं को राममंदिर कार्यशाला में लाकर सज्जित किया गया था।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा बताते हैं कि शिलापूजन कार्यक्रम सिर्फ भारत तक ही नहीं सीमित रहा बल्कि राम के प्रति आस्था पूरे विश्व में है। इसका प्रमाण भी इस शिलापूजन कार्यक्रम से हुआ।
विदेशों से भी राम मंदिर निर्माण के लिए शिलादान के माध्यम से ईंटों का सहयोग मिला। वे बताते हैं कि करीब 55 देशों से राममंदिर निर्माण के लिए पूजित ईंटें आईं।
सूरीनाम, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, जर्मनी, कनाडा, वर्मा, बांग्लादेश जैसे देश से ईंटें दान में मिली। ईंटों पर अंग्रेजी, बांग्ला, डच, नेपाली आदि लिपि में अंकित रामनाम इस सच्चाई को बयां करते है।

अयोध्या-राममंदिर कार्यशाला में सहेज कर रखी गयी रामशिला- फोटो : FAIZABAD

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